भारत

मातृ वंदना योजना तकनीकी रूप से हुई सशक्त

यह व्यवस्था देश के 740 से अधिक जिलों में लागू हो चुकी है।

अंजलि भाटिया

नई दिल्ली: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) अब तकनीक आधारित, पारदर्शी के रूप में सामने आ रही है। PRAGATI बैठक के बाद किए गए सुधारों ने योजना के क्रियान्वयन को और मजबूत किया है। डिजिटल निगरानी, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और ड्यू लिस्ट जैसी व्यवस्थाओं से न केवल पात्र लाभार्थियों तक समय पर मदद पहुंच रही है, बल्कि फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी रोक लगी है।

शिशु जन्म पर प्रोत्साहन राशि

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना 1 जनवरी 2017 से देशभर में लागू है। योजना के तहत पहले बच्चे के जन्म पर ₹5,000 और दूसरे बच्चे के जन्म पर (यदि बच्ची हो) ₹6,000 की सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के माध्यम से दी जाती है। योजना की शुरुआत से 8 जनवरी 2026 तक 4.26 करोड़ महिलाओं को ₹20,060 करोड़ की मातृत्व सहायता प्रदान की जा चुकी है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 59.19 लाख लाभार्थियों को ₹2,022.08 करोड़ का भुगतान किया गया है।

फेशियल रिकग्निशन से पारदर्शिता बढ़ी

PRAGATI बैठक के बाद 21 मई 2025 से PMMVY के तहत नए पंजीकरण के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। यह सुविधा पोषण ट्रैकर के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। अब तक 23.60 लाख से अधिक महिलाओं का नामांकन इसी प्रणाली से किया जा चुका है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं को ही मिले। यह व्यवस्था अब देश के 740 से अधिक जिलों में लागू हो चुकी है।

आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की मदद से होता है कार्य संपन्न

लाभार्थियों को खुद दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए पोषण ट्रैकर के डेटा के आधार पर संभावित लाभार्थियों की ‘ड्यू लिस्ट’ तैयार की जा रही है। यह सूची आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाती है, जो घर-घर जाकर पात्र महिलाओं का पंजीकरण कर रही हैं। 1 जुलाई 2025 से शुरू इस व्यवस्था के जरिए अब तक 15.81 लाख महिलाओं को योजना से जोड़ा गया है। कुल पंजीकरण का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी माध्यम से हुआ है।

औसत समाधान समय 19 दिन

PMMVY के तहत एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली भी लागू की गई है। महिलाएं अब पोर्टल, हेल्पलाइन 1515 या CPGRAMS के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। अब तक दर्ज 60 हजार से अधिक शिकायतों में से 85 प्रतिशत से ज्यादा का समाधान किया जा चुका है। औसत समाधान समय 19 दिन रहा है। लाभार्थी अब अपने मोबाइल नंबर या लाभार्थी आईडी के जरिए आवेदन और भुगतान की स्थिति ऑनलाइन देख सकती हैं। अब तक 7.36 लाख से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं।

377 परियोजनाओं की समीक्षा

PRAGATI-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र ने 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति दी है और बड़े पैमाने पर प्रमुख कल्याणकारी कार्यक्रमों के ज़मीनी क्रियान्वयन में सहायता की है। 2014 से अब तक PRAGATI के तहत 377 परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिनमें पहचानी गई 3,162 समस्याओं में से 2,958 लगभग 94 प्रतिशत का समाधान किया गया। इससे देरी, लागत वृद्धि और समन्वय की विफलताओं में उल्लेखनीय कमी आई

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