मेघालय-नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की। मामला न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ के समक्ष आया। मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उसी दिन दोपहर में सुनवाई का आग्रह किया, जबकि बचाव पक्ष ने अगले सप्ताह की तारीख देने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 21 जुलाई को सुनवाई निर्धारित कर दी। सोनम रघुवंशी पर आरोप है कि उसने 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति और इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश भाड़े के हत्यारों के साथ मिलकर रची। पुलिस का दावा है कि वारदात आर्थिक लाभ के उद्देश्य से अंजाम दी गई। दंपति 23 मई 2025 को मेघालय के सोहरा क्षेत्र में लापता हो गए थे और 2 जून को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ था।
टाइपिंग त्रुटि पर कानूनी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई की सुनवाई में संकेत दिया था कि गिरफ्तारी ज्ञापन में टाइपिंग की गलती से गलत कानूनी धारा दर्ज होने को क्या गिरफ्तारी रद्द करने और जमानत देने का आधार माना जा सकता है। अदालत ने कहा था कि यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बड़ी पीठ के समक्ष भी भेजा जा सकता है और इस पहलू की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। इससे पहले 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने मेघालय हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
केवल लिपिकीय त्रुटि थी
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि गिरफ्तारी ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के स्थान पर धारा 403 का उल्लेख होना केवल लिपिकीय त्रुटि थी, इसलिए इसे गिरफ्तारी या जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता। वहीं, मेघालय हाई कोर्ट ने 29 जून को अधीनस्थ अदालत द्वारा 27 अप्रैल को दिए गए जमानत आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि गिरफ्तारी के आधार तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही दिखाई देती है, क्योंकि गिरफ्तारी ज्ञापन में ऐसी धारा का उल्लेख किया गया, जिसका इस मामले से कोई संबंध नहीं था। अदालत ने इसे न्यायिक विवेक के अभाव का उदाहरण भी माना था।