भारत

छह सांसदों के विलय पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची शिवसेना

शिंदे गुट को चुनौती

नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा मंजूरी दिए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। पार्टी ने इसे दल-बदल निरोधक कानून की भावना के विपरीत बताते हुए मंजूरी को चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग
शिवसेना (उबाठा) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि याचिका को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हम देखेंगे।”

लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर आपत्ति
कामत ने अदालत को बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने को मंजूरी दे दी थी। उन्होंने दलील दी कि अध्यक्ष ने सांसदों के विलय को मान्यता दी है, जबकि ये सांसद उसी दल के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। उनका कहना था कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक नई और चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है।

दल-बदल कानून का हवाला
याचिकाकर्ता का कहना है कि सांसदों का यह कदम दल-बदल निरोधक कानून के दायरे में आता है। शिवसेना (उबाठा) ने पहले भी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष मांग की थी कि बागी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाए, क्योंकि उन्होंने उस राजनीतिक दल को छोड़ दिया, जिसके चुनाव चिह्न और समर्थन पर वे निर्वाचित हुए थे।

लोकसभा में बदला संख्याबल
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, छह सांसदों के शामिल होने के बाद लोकसभा में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सदस्य संख्या बढ़कर 13 हो गई है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (उबाठा) के टिकट पर कुल नौ सांसद निर्वाचित हुए थे, जिनमें से अब छह सांसद शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। इस घटनाक्रम के बाद संसद में दोनों शिवसेना गुटों के बीच राजनीतिक और कानूनी विवाद और गहरा गया है।

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