मुंबई : छात्र हितों की बात करने वाले संगठनों से हमेशा पारदर्शिता और समान भागीदारी की उम्मीद की जाती है। हालांकि, भारतीय राजनीति की तरह अब नए छात्र संगठनों पर भी परिवारवाद और भाई-भतीजावाद के आरोप लगने लगे हैं।
ताजा मामला महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर का है, जहां कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की कोर कमेटी के गठन को लेकर विवाद गहरा गया है। पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल अभिजीत दीपके के घर के बाहर कुछ युवाओं ने प्रदर्शन करते हुए संगठन के नेतृत्व पर पक्षपात और चुनिंदा लोगों को तरजीह देने का आरोप लगाया।
कोऑर्डिनेटर्स की अनदेखी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि वे जंतर-मंतर में हुए छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय रूप से जुड़े रहे और कई लोगों ने कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी निभाई।
उनका आरोप है कि हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में केवल अभिजीत दीपके के करीबी और परिचित लोगों को आमंत्रित किया गया, जबकि आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले कई कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समूह का नहीं, बल्कि देशभर के युवाओं की सामूहिक पहल थी। उनके अनुसार, आंदोलन से लगभग 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे, लेकिन कोर कमेटी के गठन और बैठक में अधिकांश को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
उनका कहना है कि यदि संगठन वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है, तो सभी सक्रिय कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में समान अवसर मिलना चाहिए।
अनशन की चेतावनी, नेतृत्व से जवाब की मांग
युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका से देर रात तक बैठक और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर बातचीत हुई, लेकिन उनकी ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आंदोलन से जुड़े सभी कोऑर्डिनेटर्स को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, तो वे अभिजीत दीपके के घर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना और अनशन शुरू करेंगे।
उनका कहना है कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संगठन में पारदर्शिता, समान भागीदारी और लोकतांत्रिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग को लेकर है।
अब देखना होगा कि सीजेपी नेतृत्व इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है।