नई दिल्ली: प्रधानमंत्री को अलग-अलग मौकों पर भेंट किए गए स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी का 8वां संस्करण शुरू हो गया है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को नई दिल्ली में इसकी शुरुआत की। इस बार कुल 1,498 स्मृति चिह्न नीलामी के लिए रखे गए हैं। ऑनलाइन नीलामी 17 सितंबर से आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से शुरू हुई है और 31 अक्टूबर तक चलेगी।
इस संग्रह में देश के अलग-अलग हिस्सों की कला, शिल्प, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, बिहार और ओडिशा समेत कई राज्यों से जुड़ी वस्तुएं इसमें शामिल हैं। इनमें पारंपरिक कलाकृतियों के साथ आध्यात्मिक परंपराओं, खेल और देश की सांस्कृतिक विविधता से जुड़ी वस्तुओं को भी जगह दी गई है।
इस बार नीलामी में 50 वस्तुओं को खास तौर पर ‘हीरो ऑब्जेक्ट्स’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें कर्नाटक से भगवान राम की चांदी की स्मृति वस्तु सबसे अधिक आधार मूल्य वाली वस्तुओं में शामिल है। इसका आधार मूल्य ₹13.50 लाख रखा गया है।
इसके अलावा काकतीय कला तोरणम की चांदी की प्रतिकृति का आधार मूल्य ₹9 लाख, ‘ट्री ऑफ लाइफ’ गोंड कला पेंटिंग का ₹7.50 लाख, रथ पर जगन्नाथ परिवार की कलाकृति का ₹6 लाख और 99.99 प्रतिशत शुद्ध सोने की परत वाले राधा-कृष्ण आर्टवर्क का आधार मूल्य ₹5.40 लाख है।
संग्रह में देश की सैन्य और समुद्री विरासत से जुड़ी वस्तुएं भी हैं। इनमें भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सूरत और आईएनएस नीलगिरि के मॉडल के अलावा ब्रिटिश नौसेना के ऐतिहासिक जहाज एचएमएस विक्टरी का मॉडल भी शामिल है।
इन वस्तुओं की खासियत केवल उनकी कीमत या कलात्मक रूप में नहीं है। ये अलग-अलग मौकों पर प्रधानमंत्री को भेंट की गई थीं और अब इन्हें आम लोगों, संग्रहकर्ताओं और संस्थानों के लिए नीलामी के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रत्येक वस्तु के साथ उसकी पहचान, आकार, इस्तेमाल की गई सामग्री, स्थिति, सांस्कृतिक संदर्भ और कलात्मक पृष्ठभूमि जैसी जानकारी भी दर्ज की गई है। इससे नीलामी में शामिल वस्तुओं को केवल सजावटी सामान के तौर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ के साथ देखा जा सकता है।
इस पहल के तहत नीलामी के साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही है। इसमें लोग इन स्मृति चिह्नों को करीब से देख सकते हैं और उनकी कला व सांस्कृतिक विशेषताओं को समझ सकते हैं। राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, नई दिल्ली, इस पूरी प्रक्रिया के दस्तावेजीकरण, प्रदर्शनी और संचालन से जुड़े कामों का समन्वय कर रहा है।
पीएम मेमेंटोज की ई-नीलामी की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इससे मिलने वाली राशि ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम में दी जाती है। इस तरह नीलामी से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल गंगा नदी के संरक्षण और कायाकल्प से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम में किया जाएगा।
पिछली सात नीलामियों में 7,741 वस्तुएं नीलामी के लिए रखी जा चुकी हैं और करीब ₹52 करोड़ की राशि जुटाई गई है। अलग-अलग संस्करणों में कुछ वस्तुओं को उनके आधार मूल्य से काफी ज्यादा कीमत पर खरीदा गया है। इससे पता चलता है कि इन वस्तुओं के लिए बोली लगाने वालों के बीच केवल सामग्री या बाजार मूल्य ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी भावनात्मक और सांस्कृतिक अहमियत भी भूमिका निभाती है।
इस नीलामी में आम नागरिकों के साथ संग्रहकर्ता, संस्थान, कॉरपोरेट और कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग भी हिस्सा ले सकते हैं। ऑनलाइन बोली आधिकारिक पीएम मेमेंटोज पोर्टल के माध्यम से लगाई जा सकती है। नीलामी के साथ आयोजित प्रदर्शनी लोगों को बोली लगाने से पहले इन वस्तुओं को देखने और उनके बारे में जानकारी हासिल करने का अवसर भी देगी।
पीएम मेमेंटोज की यह नीलामी एक तरफ प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिह्नों को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम है, तो दूसरी तरफ देश के अलग-अलग हिस्सों की कला, शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं को एक ही संग्रह में देखने का मौका भी देती है। इस बार शामिल 1,498 वस्तुओं में कई ऐसी कलाकृतियां और स्मृति चिह्न हैं, जिनके साथ उनकी अपनी सांस्कृतिक कहानी जुड़ी हुई है।