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ऑपरेशन सफेद सागर फिर चर्चा में क्यों है? कारगिल से आज तक की पूरी कहानी

गुरुग्राम में एक कारगिल वेटरन पर कथित हमले के बाद 1999 की वह हवाई जंग फिर सुर्खियों में, इसी अभियान पर बनी सीरीज ने भी बढ़ाई लोगों की दिलचस्पी

Tanisha Hirawat

27 साल पहले कारगिल की बर्फीली चोटियों पर चल रही लड़ाई में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान एक बेहद चुनौतीपूर्ण मिशन पर उतरे थे। जमीन से हजारों फीट ऊपर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाना आसान नहीं था। पहाड़, मौसम, ऊंचाई और नियंत्रण रेखा पार न करने की शर्त के बीच वायुसेना को ऐसी रणनीति बनानी थी, जो जमीनी सैनिकों के अभियान को भी मजबूत कर सके। इसी चुनौती से निकला था ऑपरेशन सफेद सागर

आज इस अभियान का नाम एक बार फिर चर्चा में है। गुरुग्राम में भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन और कारगिल वेटरन अमित कुमार गुप्ता पर पार्किंग विवाद के बाद कथित तौर पर लोहे की रॉड से हमला किया गया। इस हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और हाथ में फ्रैक्चर हुआ। इसी साल इस अभियान पर आधारित छह एपिसोड की सीरीज भी रिलीज हुई है।

जब आसमान बना जंग का दूसरा मोर्चा

1999 में कारगिल की ऊंची चोटियों पर पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों के कब्जे के बाद भारतीय सेना ने उन्हें पीछे हटाने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया। 26 मई 1999 को भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत हवाई कार्रवाई शुरू की।

यह अभियान किसी सामान्य युद्धक्षेत्र में नहीं चल रहा था। कई लक्ष्य 16 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर थे। इतनी ऊंचाई पर हवा का दबाव, मौसम और पहाड़ी भूगोल उड़ान और निशाना साधने दोनों को मुश्किल बनाते थे। इसके अलावा वायुसेना को नियंत्रण रेखा के पार नहीं जाना था।

Group Captain Veteran Amit Kumar Gupta (retired)- Indian Air Force

Mirage 2000 और सटीक हमले

इस अभियान में Mirage 2000 लड़ाकू विमानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। कारगिल युद्ध के दौरान इन विमानों से लेजर-निर्देशित बमों का इस्तेमाल कर पहाड़ों पर मौजूद ठिकानों को सटीक निशाना बनाया गया।

ऊंची चोटियों पर बने ठिकानों को जमीन से निशाना बनाना पहले ही मुश्किल था। ऐसे में हवाई हमलों में सटीकता और लक्ष्य की सही पहचान बेहद जरूरी थी। टाइगर हिल और आसपास के रणनीतिक ठिकानों पर किए गए हमले ऑपरेशन सफेद सागर के सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में गिने जाते हैं।

सफेद सागर सिर्फ बमबारी तक सीमित नहीं था

इस अभियान में लड़ाकू विमानों की कार्रवाई के अलावा टोही, निगरानी, हवाई सुरक्षा और सेना के लिए रसद पहुंचाने जैसे काम भी शामिल थे। हेलीकॉप्टरों ने सैनिकों और सामान की आवाजाही के साथ घायलों को निकालने में भी भूमिका निभाई। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ने हजारों स्ट्राइक और निगरानी मिशन किए। इन हवाई अभियानों का मकसद जमीनी सैनिकों को ऊपर से सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त देना था।

27 साल बाद फिर क्यों लौटा चर्चा में?

1999 की लड़ाई के बाद ऑपरेशन सफेद सागर भारतीय सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। लेकिन 2026 में इसका नाम फिर आम चर्चा में आया। इस अभियान पर आधारित सीरीज ने कारगिल युद्ध में वायुसेना की भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाया। वहीं, गुरुग्राम की ताजा घटना में एक सफेद सागर वेटरन का नाम सामने आने से लोगों का ध्यान एक बार फिर इस अभियान की ओर गया।

ऑपरेशन सफेद सागर की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि कारगिल की लड़ाई को केवल जमीन पर हुई जंग के तौर पर नहीं देखा जा सकता। ऊंची चोटियों पर सैनिकों की लड़ाई के साथ आसमान में चल रहे हवाई अभियानों ने भी युद्ध की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई थी।

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