भारत

नोटबंदी की चोट से अर्थव्यवस्था उबर नहीं पाई : कांग्रेस

नोटबंदी के नौवीं वर्षगांठ पर जयराम रमेश ने सरकार को सुनाई खरी-खोटी

नई दिल्ली : नोटबंदी के नौवीं वर्षगांठ पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी जैसे 'तुगलकी फैसले' से भारतीय अर्थव्यवस्था को जो चोट लगी थी, उससे वह आज तक उबर नहीं पाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को देश में नोटबंदी का एलान किया, जिसके बाद से 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिए गए और 500 एवं 2000 के नए नोट जारी किए गए। अब 2000 का नोट भी चलन से बाहर किया जा चुका है।

जयराम रमेश ने X पर लिखा

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'आज नोटबंदी जैसे विनाशकारी और तुगलक़ी फ़ैसले की नौवीं वर्षगांठ है। करोड़ों भारतीयों की आजीविका बर्बाद हो गई। व्यापार, असंगठित क्षेत्र, और लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) चौपट हो गए। काले धन और जाली नोटों में कोई कमी नहीं आई। कैशलेस का नारा बेमानी साबित हुआ। 2000 रुपये का जो नोट जारी किया गया था, उसे वापस ले लिया गया।'

उन्होंने यह भी दावा किया, "नोटबंदी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ गई। उस चोट से देश की अर्थव्यवस्था कभी भी पूरी तरह से उबर नहीं पाई।"

नोटबंदी कब हुई थी

नोटबंदी (Demonetisation) एक आर्थिक घटना है जिसमें सरकार द्वारा किसी देश की मुद्रा (करेंसी) के कुछ विशेष नोटों या सिक्कों की कानूनी वैधता (legal tender) को समाप्त कर दिया जाता है। इसका मतलब है कि वे नोट या सिक्के कानूनी रूप से मान्य नहीं रहते हैं और उनका उपयोग किसी भी प्रकार के लेनदेन, खरीद-बिक्री या भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता।

भारत के संदर्भ में, 'नोटबंदी घटना' से आमतौर पर 8 नवंबर 2016 की घटना का जिक्र होता है।हालांकि सरकार नोटबंदी को ऐतिहासिक करार देते हुए सफल बताती है। लेकिन विपक्ष इसे देश के लोकतंत्र के लिए काला दिन बताकर हमेशा सरकार की आलोचना करता रहा है।

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