नई दिल्ली : इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) तक पहुंच बनाने वाले कथित पेड विज्ञापनों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है।
आयोग ने मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए Meta, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग के सामने रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर ऐसे विज्ञापन दिखाई दिए जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर यूजर्स को Telegram चैनलों तक पहुंचाया जा रहा था।
आरोप है कि इन चैनलों पर बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री उपलब्ध कराने या बेचने की पेशकश की जा रही थी। रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि Meta की विज्ञापन समीक्षा प्रणाली से गुजरने के बावजूद ऐसी सामग्री प्लेटफॉर्म पर कैसे पहुंची।
POCSO कानून के तहत रिपोर्टिंग पर NHRC के सवाल
NHRC ने POCSO Act की धारा 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े किसी अपराध की जानकारी मिलने पर पुलिस या Special Juvenile Police Unit (SJPU) को इसकी सूचना देना कानूनी रूप से जरूरी है।
आयोग ने यह भी पूछा है कि MeitY को मामले की जानकारी मिलने के बाद क्या इसे संबंधित पुलिस अथॉरिटी तक पहुंचाया गया था। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी, इसका जवाब भी मांगा गया है।
दिल्ली पुलिस से भी अब तक की जांच, कार्रवाई और Telegram से मांगी गई अथवा प्राप्त जानकारी का विवरण देने को कहा गया है। आयोग ने संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर पॉइंट-वाइज एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
Meta के AI सिस्टम की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामला केवल कथित विज्ञापनों तक सीमित नहीं है। NHRC ने Meta के AI और एल्गोरिदम आधारित सिस्टम की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
आयोग यह जांचना चाहता है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म कंटेंट को सिर्फ होस्ट करने के बजाय उसे तैयार करने, संशोधित करने, सुझाने, क्यूरेट करने, आगे बढ़ाने या उससे कमाई में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो क्या उसकी कानूनी जिम्मेदारी भी अलग तरीके से तय होनी चाहिए।
आयोग ने MeitY और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से यह भी विचार करने को कहा है कि Meta की ऐसी भूमिका की स्थिति में उसे IT Rules, 2021 के तहत पब्लिशर या ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट से संबंधित नियामकीय दायरे में देखा जाना चाहिए या नहीं।
NHRC ने स्पष्ट किया है कि मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि आरोप सही पाए जाने पर यह केवल आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री का विषय नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के यौन शोषण, सामग्री की रिकॉर्डिंग, प्रसार और कथित तौर पर उससे कमाई जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ सकता है। फिलहाल आयोग की जांच और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।