पुरी (ओडिशा)। श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का विशेष सर्वेक्षण रविवार को पूरा कर लिया गया। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की वार्षिक रथयात्रा के दौरान ओडिशा सरकार द्वारा स्वीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत यह प्रक्रिया पूरी की गई। मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य रत्न भंडार में रखे आभूषणों और अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियों का सत्यापन करना था।
सर्वेक्षण के दौरान देवताओं के उपयोग में आने वाले आभूषणों की गिनती की गई और उनका वजन भी दर्ज किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इसमें सोने-चांदी के आभूषण, ‘राहु रेखा’, चांदी की ‘रसिका’ और भगवान से जुड़ी अन्य सामग्री शामिल थीं। सभी वस्तुओं का सावधानीपूर्वक मिलान किया गया ताकि रिकॉर्ड को व्यवस्थित किया जा सके।
मंदिर में चल रहे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सवों के कारण रत्न भंडार की यह प्रक्रिया 23 मई से रोक दी गई थी। पिछले महीने स्नान पूर्णिमा के अवसर पर देवताओं के विग्रहों से उतारे गए आभूषणों को भी इस विशेष सर्वेक्षण में शामिल किया गया।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। उन्होंने कहा कि सत्यापन के दौरान रत्न भंडार में मौजूद आभूषणों और सामग्रियों की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
मंदिर प्रशासन ने बताया कि रत्न भंडार से जुड़ी सामग्री का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने के लिए यह सर्वे कराया गया है। पूरी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुसार पूरा किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के सर्वे से मंदिर की बहुमूल्य धरोहरों के संरक्षण और प्रबंधन में मदद मिलेगी। श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार लंबे समय से श्रद्धालुओं और लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है।