अंजलि भाटिया
नई दिल्ली : कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने और चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने तीखे शब्दों में कहा कि देश में लोकतंत्र का अंतिम संस्कार किया जा रहा है और चुनाव अब निष्पक्ष नहीं रह गए हैं। खेड़ा ने आरोप लगाया कि असम और पश्चिम बंगाल में जनादेश को सुनियोजित तरीके से पलटा गया। उनके मुताबिक, एक नरिमोट कंट्रोल चुनावी तंत्र के जरिए उन संस्थाओं पर कब्जा कर लिया गया है, जिनकी जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव कराना है। उन्होंने कहा कि आज लोकतंत्र केवल एक ढांचा बनकर रह गया है, जिसे सत्ता के मुताबिक चलाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल को लेकर उन्होंने बेहद गंभीर दावे किए। खेड़ा के अनुसार, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए और 27 लाख लोगों को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं मिला।
उनका कहना है कि 50 से ज्यादा सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर से भी ज्यादा थी, जिससे नतीजे पहले से तय हो गए। कांग्रेस ने इसे चुनावी इंजीनियरिंग करार दिया और कहा कि यह सीधा जनादेश से खिलवाड़ है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह कोई एक राज्य की घटना नहीं, बल्कि पूरे देश में दोहराया जा रहा पैटर्न है। उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि हर जगह चुनावी गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। कर्नाटक के आलंद क्षेत्र में हजारों फर्जी आवेदन देकर वोटर हटाने की कोशिश का आरोप लगाया गया, जबकि हरियाणा में एक ही महिला की तस्वीर का कई बार इस्तेमाल कर फर्जी वोटिंग कराने जैसे मामले सामने आने का दावा किया गया। महाराष्ट्र को लेकर खेड़ा ने कहा कि सिर्फ पांच महीनों में 40 लाख नए वोटर जुड़ना और मतदान प्रतिशत का अचानक बढ़ना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सिर्फ आंकड़ों की गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश के संकेत हैं। खेड़ा ने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा को अंदाजा हो गया है कि जनता उसे वोट से सत्ता से हटा सकती है, इसलिए अब वह चुनावी प्रक्रिया को ही प्रभावित करने में जुटी है।
उनके मुताबिक, SIR का इस्तेमाल वोट देने के अधिकार को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है और देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष को खत्म करने के लिए हर तरीका अपना रही है—चाहे वह केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल हो, झूठे मामले हों या चुनावी सूची में छेड़छाड़। उनका कहना है कि मकसद साफ है।संसद और विधानसभाओं में विपक्ष को कमजोर कर राजनीतिक मुकाबले को खत्म करना। पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा को लेकर भी खेड़ा ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के दफ्तरों में आगजनी, कार्यकर्ताओं पर हमले और लोगों को डराने-धमकाने की घटनाएं हो रही हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी और इंडिया गठबंधन के साथ खड़े होने की बात दोहराई। खेड़ा ने कहा कि यह सिर्फ वोट की चोरी नहीं, बल्कि संस्थागत कब्जा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं अब निष्पक्ष रेफरी की भूमिका में नहीं हैं, बल्कि सत्ता के साथ खड़ी नजर आ रही हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए, तो लोकतंत्र की बुनियाद ही खतरे में पड़ जाएगी।