नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय को मंगलवार को सूचित किया गया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में राय दी है कि स्वयंभू बाबा आसाराम को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे चौबीसों घंटे चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होगी।
न्यायमूर्ति जस्टिस एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले के पीठ को एम्स की रिपोर्ट की जानकारी तब दी गई जब वह आसाराम द्वारा स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम जमानत के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राजस्थान सरकार का पक्ष रखने के लिए पेश हुए एक अधिवक्ता ने कहा, ‘‘(एम्स की) की रिपोर्ट के मुताबिक, उसे अस्पताल में भर्ती कराने की कोई जरूरत नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसे (आसाराम को) सभी चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।’’ आसाराम का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि रिपोर्ट को पूरे संदर्भ में देखना चाहिए। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दी।
शीर्ष अदालत ने 21 जुलाई को एम्स से आसाराम की हालत का आकलन करने के लिए एक चिकित्सा बोर्ड गठित करने को कहा था। राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2013 में एक नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में आसाराम को दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा देने के निचली अदालत के फैसले को 27 मई को बरकरार रखा था। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली आसाराम की याचिका पर 30 जून को राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया था।