एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ स्मार्टफोन के फीचर्स में भी तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। 
भारत

165 हर्ट्ज स्क्रीन से 9,000 एमएएच बैटरी तक, स्मार्टफोन में अब क्या बदल रहा?

कैमरा और प्रोसेसर की रेस के बाद कंपनियों का जोर बड़ी बैटरी, तेज स्क्रीन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन पर

Tanisha Hirawat

स्मार्टफोन में नया क्या है, यह सवाल अब सिर्फ कैमरे के मेगापिक्सल या प्रोसेसर की ताकत तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले कुछ समय में कंपनियों ने फोन के उन हिस्सों पर भी तेजी से काम करना शुरू किया है, जिनका असर सीधे रोजमर्रा के इस्तेमाल पर पड़ता है। स्क्रीन की गति बढ़ रही है, बैटरी की क्षमता लगातार ऊपर जा रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब फोन के अलग-अलग कामों में शामिल हो रही है। यानी कंपनियों के बीच मुकाबला अब सिर्फ यह दिखाने का नहीं कि किस फोन का एक फीचर सबसे बड़ा है, बल्कि यह साबित करने का भी है कि पूरा फोन कितनी बेहतर तरह से काम करता है।

इस बदलाव का सबसे साफ उदाहरण बैटरी है। कुछ साल पहले 5,000 एमएएच की बैटरी को बड़ी क्षमता माना जाता था। अब भारतीय बाजार में 7,000 एमएएच की बैटरी आम होती जा रही है और 9,000 एमएएच तक की क्षमता वाले फोन भी बाजार में आ चुके हैं। 91मोबाइल्स के 2026 के विश्लेषण के अनुसार, 7,000 एमएएच अब कई फोन में सामान्य क्षमता की ओर बढ़ रहा है, जबकि कुछ मॉडलों में 9,000 एमएएच या उससे भी ज्यादा बैटरी दी जा रही है। रियलमी के एक फोन में 10,001 एमएएच की बैटरी तक पहुंच चुकी है।

बड़ी बैटरी के पीछे सिर्फ अधिक क्षमता देने की कोशिश नहीं है। कंपनियां ऐसी बैटरी तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे ज्यादा ऊर्जा को अपेक्षाकृत कम जगह में रखा जा सके। इसके साथ चार्जिंग की गति भी बढ़ाई जा रही है, क्योंकि बड़ी बैटरी को धीमी गति से चार्ज करना उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। 91मोबाइल्स के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि बैटरी की क्षमता बढ़ने के साथ फोन की ऊर्जा दक्षता में भी सुधार हुआ है। यानी सिर्फ एमएएच बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, फोन कम ऊर्जा में ज्यादा देर चले, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

स्क्रीन के मामले में भी कंपनियां इसी तरह आगे बढ़ रही हैं। 120 हर्ट्ज का रिफ्रेश रेट अब कई फोन में मिल रहा है, लेकिन कुछ कंपनियां इससे आगे बढ़कर 144 और 165 हर्ट्ज तक पहुंच रही हैं। वनप्लस ने अपने अगले फोन वनप्लस 16 के लिए 165 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट की पुष्टि की है। इसका फायदा खास तौर पर तेज स्क्रॉलिंग, गेम खेलने और स्क्रीन पर होने वाली गतिविधियों को अधिक सहज बनाने में मिल सकता है। यहां बदलाव सिर्फ संख्या बढ़ाने का नहीं है। कंपनियां अब स्क्रीन को तेज प्रतिक्रिया देने के साथ बेहतर चमक, कम ऊर्जा खपत और बेहतर दृश्य अनुभव से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

कैमरे की दौड़ भी अब केवल मेगापिक्सल तक सीमित नहीं है। 200 मेगापिक्सल जैसे बड़े आंकड़े चर्चा में जरूर रहते हैं, लेकिन कंपनियां सेंसर, तस्वीरों की प्रक्रिया, कम रोशनी में तस्वीरों की गुणवत्ता, दूर की वस्तुओं को साफ दिखाने वाली तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तस्वीर सुधार पर भी जोर दे रही हैं। 2026 में आने वाले कई महंगे फोन में कैमरा हार्डवेयर के साथ तस्वीर को सॉफ्टवेयर के जरिए बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि कैमरे की असली क्षमता अब सिर्फ उसके मेगापिक्सल देखकर तय करना मुश्किल है।

इसके बाद आता है कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता इस्तेमाल। पहले एआई को फोन में एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में पेश किया जाता था, लेकिन अब कंपनियां इसे कैमरा, अनुवाद, खोज, लिखने, तस्वीरों में बदलाव और स्क्रीन पर मौजूद जानकारी को समझने जैसे कामों में जोड़ रही हैं। सैमसंग भी अपने नए फोन में एआई को फोन के रोजमर्रा के इस्तेमाल का हिस्सा बनाने पर जोर दे रहा है।

भारत में भी खरीदारों की दिलचस्पी इस दिशा में बढ़ रही है। अमेजन इंडिया के जुलाई 2026 में किए गए 40 हजार से ज्यादा लोगों के सर्वेक्षण में 82 प्रतिशत लोगों ने कहा कि एआई सुविधाएं उनके फोन खरीदने के फैसले को प्रभावित करती हैं। हालांकि, सबसे ऊपर अब भी फोन का प्रदर्शन और गति रहे, जिन्हें 87 प्रतिशत लोगों ने महत्वपूर्ण माना। इसके बाद बैटरी 79 प्रतिशत और कैमरा 77 प्रतिशत लोगों के लिए अहम रहा।

यही वजह है कि कंपनियों की नई रणनीति को केवल “ज्यादा फीचर” की दौड़ के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। खरीदार अब फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करने के हिसाब से भी देख रहे हैं। 2026 की एक अन्य उपभोक्ता रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपयोगकर्ता फोन बदलने से पहले ज्यादा समय तक अपने मौजूदा फोन को रखने और अगली खरीदारी में ज्यादा सोच-समझकर पैसा खर्च करने की ओर बढ़ रहे हैं।

ऐसे में आने वाले स्मार्टफोन में बड़ी बैटरी, तेज स्क्रीन, बेहतर कैमरा और एआई जैसी सुविधाएं तो बढ़ती रहेंगी, लेकिन असली मुकाबला इन सबको एक साथ बेहतर तरीके से काम कराने का होगा। किसी फोन में 200 मेगापिक्सल का कैमरा या 9,000 एमएएच की बैटरी होना अपने आप में पर्याप्त नहीं होगा। सवाल यह होगा कि कैमरा वास्तविक इस्तेमाल में कितना अच्छा है, बैटरी कितनी देर चलती है, फोन कितना गर्म होता है, स्क्रीन कितनी सहज लगती है और एआई सुविधाएं वास्तव में रोजमर्रा के काम आती हैं या नहीं। स्मार्टफोन की अगली दौड़ शायद इसी बदलाव की ओर बढ़ रही है—कागज पर बड़े आंकड़ों से आगे जाकर वास्तविक इस्तेमाल को बेहतर बनाने की दौड़।

SCROLL FOR NEXT