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पाकिस्तानी विपक्षी नेता ने सेना के बढ़ते वर्चस्व पर चेताया

पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठान की बढ़ती ताकत पर मौलाना फजलुर रहमान ने जताई चिंता, कहा- सत्ता का असंतुलन देश की स्थिरता के लिए खतरा

Muskan Lall

पाकिस्तान के विपक्षी नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-एफ (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सैन्य प्रतिष्ठान के हाथों में राजनीतिक और संस्थागत शक्तियों के बढ़ते केंद्रीकरण पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश की स्थिरता के लिए जरूरी है कि सेना, नौकरशाही और निर्वाचित संस्थाएं अपनी-अपनी संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करें।

शुक्रवार को पंजाब प्रांत के मुल्तान जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए रहमान ने कहा कि जब राज्य की संस्थाएं अपने निर्धारित दायरे में काम करती हैं, तभी पाकिस्तान प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।

उन्होंने कहा, “जो ताकतवर लोग अधिक से अधिक अधिकार अपने कंधों पर ले रहे हैं, वे जल्द ही ऐसी स्थिति में पहुंच जाएंगे, जहां वे खुद अपनी सत्ता के बोझ तले दब जाएंगे।” उनके इस बयान को सैन्य प्रतिष्ठान की बढ़ती भूमिका पर निशाने के रूप में देखा जा रहा है।

रहमान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कैबिनेट की सिफारिश पर 11 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू किया था। इसके साथ ही जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को हटा दिया गया था।

रहमान ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला बताया था। उन्होंने इसका विरोध लोकतांत्रिक तरीकों से करने का संकल्प भी लिया था।

JUI-F प्रमुख ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के चुनावी जनादेश पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार को ‘फर्जी सरकार’ बताते हुए उसके नेताओं को ‘अधिकारहीन शासक’ कहा।

रहमान ने कहा, “हमने संसद का रास्ता चुना है। आज पाकिस्तान की जनता और पूरी दुनिया देख सकती है कि संसदीय राजनीति, लोकतंत्र और जनता से जुड़ी राजनीति को कौन-सी ताकत नुकसान पहुंचा रही है। अब यह बात छिपी नहीं है।”

उन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की लोकतांत्रिक साख पर भी सवाल उठाए और खैबर पख्तूनख्वा में शासन बदलने के फैसले को लेकर राष्ट्रपति जरदारी की आलोचना की।

पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने रहमान के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल असीम मुनीर के बारे में उनकी टिप्पणियों से “हर देशभक्त पाकिस्तानी को ठेस पहुंची है।”

मरियम नवाज ने रहमान पर खैबर पख्तूनख्वा में कथित अक्षमता, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने के बजाय उनका समर्थन करने का आरोप लगाया।

इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका, निर्वाचित सरकारों के अधिकार और प्रांतीय शासन व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है।

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