तेहरान : ईरान ने कहा है कि वह इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए तभी तैयार होगा, जब अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म कर दे। ईरान ने इसे सीजफायर उल्लंघन और एक्ट ऑफ वार करार दिया है। हालांकि, इस बीच ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान न पहुंचने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को एकतरफा तरीके से बढ़ा दिया है । यह घोषणा तब की गई है, जब आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम कुछ ही घंटों में समाप्त होने वाला था । इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा भी प्रभावी रूप से टल गई, जहां ईरानी प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता प्रस्तावित थी।
ईरान ने बातचीत के लिए रखी शर्त
ईरान ने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली दूसरे चरण की शांति वार्ता में शामिल होने के लिए एक शर्त रखी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के दूत अमीर सईद इरावानी ने कहा है कि बातचीत पाकिस्तान की राजधानी में तभी होगी, जब अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी खत्म कर देगा। उनका यह बयान तब आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस उम्मीद के साथ सीजफायर बढ़ाया है कि तेहरान इस संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म करने का प्रस्ताव देगा। ईरानी दूत ने कहा कि अमेरिका को सीजफायर का उल्लंघन तुरंत रोकना चाहिए। 10 दिन का यह सीज़फ़ायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला था।
ईरान की शर्त ये है
ईरानी मीडिया से बातचीत में इरावानी ने कहा, "जैसे ही अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करेगा, मुझे लगता है कि बातचीत का अगला दौर इस्लामाबाद में होगा।" "बातचीत के किसी भी नए दौर से पहले अमेरिका को 'सीजफायर के उल्लंघन' को रोकना होगा। हमने सैन्य आक्रामकता की शुरुआत नहीं की है। अगर वे राजनीतिक समाधान चाहते हैं, तो हम तैयार हैं। अगर वे युद्ध चाहते हैं, तो ईरान उसके लिए भी तैयार है... जब ऐसा होगा, तो बातचीत का अगला दौर इस्लामाबाद में होगा।" वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने अमेरिका का मजाक उड़ाते हुए कहा कि सीजफायर बढ़ाने का कोई "मतलब नहीं" है, क्योंकि "हारने वाला पक्ष अपनी शर्तें नहीं थोप सकता।" उन्होंने सीज़फ़ायर बढ़ाने को "अचानक हमला करने के लिए समय निकालने" की एक चाल बताया।