बिनपुर के हरदा गांव में हो रही मां लक्ष्मी के साथ मां सरस्वती की पूजा  
पश्चिम बंगाल

बीनपुर के हरदा गांव में धनदेवी के साथ होती है विद्या की देवी की पूजा

लगता है जलेबी का मेला

Rajesh kumar

राजेश, सन्मार्ग संवाददाता

झाड़ग्राम : रविवार को राज्य में मूलरूप से बांग्ला भाषी लोगों ने धन की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा की। दुर्गापूजा के ठीक बाद होने वाली इस लक्षमी पूजा की भी धूम होती है। लेकिन झारग्राम जिले के बीनपुर के हरदा गांव में धन की देवी माँ लक्ष्मी के साथ साथ विद्या की देवी माँ सरस्वती की भी पूजा की जाती है जो काफी मशहूर है। थी नहीं इस मौके पर जलेबी का मेला भी लगता है और शायद ही कोई मिलेगा जो मेले से वापस लौटते समय जलेबी ना ले जा रहा हो। बिनपुर 2 ब्लॉक के हरदा ग्राम पंचायत के हरदा गांव में साहा और मंडल परिवार में यह पूजा होती है।

झारग्राम जिले के बिनपुर 2 ब्लॉक के हरदा ग्राम पंचायत के हरदा गांव में साहा और मंडल परिवार में मां लक्ष्मी के साथ साथ मां सरस्वती की पूजा होती है। इस बार 164 साल हो गए हैं लेकिन पुरखों द्वारा शुरू की गई पूजा की धूम कम नहीं हुई है। गांव वालों ने बताया कि इस गांव की मुख्य पूजा लक्ष्मी है। यह पूजा पांच दिनों तक चलती है। श्री श्री कोजागरी लक्ष्मी पूजा कमिटी के पदाधिकारी कार्तिक मंडल ने कहा, विष्णु पुराण के अनुसार, लक्ष्मी और सरस्वती नारायण की दो पत्नियां हैं। हम एक के बिना दूसरी की पूजा कैसे कर सकते हैं? इसीलिए हमारे पूर्वजों ने लक्ष्मी और सरस्वती—दो देवियों की पूजा शुरू की थी। हम उसी परंपरा को निभा रहे हैं। इस पूजा को लेकर गांव के लोग उत्साहित रहते हैं। जो लोग गांव से बाहर रहते हैं, वे भी इस दौरान घर लौट आते हैं। लक्ष्मी और सरस्वती एक ही समय में साथ-साथ रहती हैं। सरस्वती का रंग गोरा और लक्ष्मी का हल्का गुलाबी है। लक्ष्मी और सरस्वती के सिर पर नारायण विराजमान होते हैं। पूजा में फल और मिठाई के साथ लड्डू भी खाए जाते हैं। लक्ष्मी पूजा 25 अक्टूबर से शुरू होकर 30 अक्टूबर तक चलेगी। पूजा का कलश उठाने के दौरान ग्रीन पटाखों का खास इंतज़ाम होता है। हरदा लक्ष्मी पूजा देखने के लिए झारग्राम ज़िले के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ आस-पास के ज़िलों से भी बहुत से लोग आते हैं। पूजा कमिटी के अध्यक्ष समर मंडल ने कहा कि इस बार पूजा का बजट करीब 15 लाख है। यह चंदा हरदा गांव के 500 साहा और मंडल परिवार देते हैं। बाहर से किसी से कोई चंदा नहीं लिया जाता है। वैसे तो पूजा के दौरान कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, लेकिन इसका खास आकर्षण जलेबी का मेला होता है। जिसमें 250 से 300 क्विंटल से ज़्यादा जलेबी बिकती है। वहां पर जलेबी की सिर्फ़ एक दुकान है। जलेबी दुकान की बिक्री नीलामी के ज़रिए होती है। कारोबारियों ने बताया कि हरदा गांव के रहने वाले सिंटू साहा को तीन महीने पहले 3 लाख 91 हज़ार 601 रुपए में जलेबी दुकान मिली थी। उन्होंने कहा कि इस जलेबी की एक खासियत है। जलेबी चावल के आटे और खमीर से बनती है और यह जलेबी पूरे साल नहीं बनती। लक्ष्मी पूजा से शुरू होकर काली पूजा के एक दिन पहले तक इस जलेबी दुकान में 250 क्विंटल से ज़्यादा जलेबी बिकती है। पिछले साल करीब 26 लाख का कारोबार हुआ था। पूजा कमिटी को जलेबी दुकान के लिए नीलामी का पैसा देने के बाद भी अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। हर साल 6 से 7 कारीगर जलेबियां बनाते हैं। इस बार छह चूल्हे के लिए नौ कारीगर हैं। मालिक ने यह इंतज़ाम इसलिए किया है ताकि जलेबियों का बनना बंद न हो। उन्हें उम्मीद है कि इस बार बिक्री और बढ़ेगी। बिनपुर थाने की पुलिस ने पूजा में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं।

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