अब तक 19 लोगों की मौत
मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिए जांच के निर्देश
पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर
प्रवेश और निकास द्वारों की खामियां तत्काल दूर करने का निर्देश
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता :
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहद वेदनादायक घटना घटी है। इस घटना में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि अन्य 25 लोग घायल हुए हैं जिनमें से एक-दो की हालत गंभीर है। हम सभी के समुचित इलाज की व्यवस्था कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये तथा घायलों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने सभी पूजा समितियों को निर्देश दिया है कि वे पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर प्रवेश और निकास द्वारों (एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स) में अगर किसी भी तरह की खामी है तो उसे तत्काल दूर करें।
लोगों की सुरक्षा थीम पूजा से अधिक महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई जगहों पर थीम पूजा के नाम पर पंडालों में अंधेरा रखा जाता है, लेकिन लोगों का जीवन थीम से कहीं अधिक मूल्यवान है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार पूजा के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने कार्यक्रम किए स्थगित
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे आधिकारिक तौर पर किसी भी उत्सव में शामिल नहीं होंगे। वहीं, गृह मंत्री ने भी अपने सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों को जल्द से जल्द स्वस्थ कर सुरक्षित उनके घर भेजना प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता पुलिस को निर्देश दिया गया है कि सुरक्षा व्यवस्था में शामिल पूजा समिति के सदस्यों, निजी सुरक्षा कर्मियों को थाने में बुलाकर पूछताछ की जाए। घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा सकें।
फॉरेंसिक जांच पूरी होने तक घटनास्थल पर नहीं जाने की अपील
मुख्यमंत्री ने राजनीतिक दलों, मीडिया और अन्य लोगों से अपील की है कि फॉरेंसिक टीम द्वारा घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जाने तक वहां जाने से बचें, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए और साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।