पश्चिम बंगाल

शिकारपुर मंदिर में छह पत्थर के सिंहों की पुनर्स्थापना

बिना विशेषज्ञ सलाह के प्रतिमाएं स्थापित करने पर संरक्षण को लेकर उठे सवाल

Khodija Khatun (Rabia)

जलपाईगुड़ी : शिकारपुर के सदियों पुराने देवीचौधरानी-भवानी पाठक मंदिर में छह पत्थर के सिंह विग्रहों को फिर से स्थापित किया गया। रविवार को मंदिर कमेटी की पहल पर इन विग्रहों को स्थापित किया गया। हालांकि, विशेषज्ञ की सलाह के बिना सामान्य मिस्त्रियों द्वारा व्हाइट सीमेंट और रसायन के इस्तेमाल से इन्हें स्थापित किए जाने को लेकर संरक्षण पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि इस दौरान कुछ विग्रहों के पैर और पूंछ भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

जलपाईगुड़ी : शिकारपुर के सदियों पुराने देवीचौधरानी-भवानी पाठक मंदिर में छह पत्थर के सिंह विग्रहों को फिर से स्थापित किया गया। रविवार को मंदिर कमेटी की पहल पर इन विग्रहों को स्थापित किया गया। हालांकि, विशेषज्ञ की सलाह के बिना सामान्य मिस्त्रियों द्वारा व्हाइट सीमेंट और रसायन के इस्तेमाल से इन्हें स्थापित किए जाने को लेकर संरक्षण पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि इस दौरान कुछ विग्रहों के पैर और पूंछ भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

मंदिर में 2018 में लगी भीषण आग में लकड़ी का ढांचा और अधिकांश विग्रह जलकर नष्ट हो गए थे। हालांकि, पत्थर के छह सिंह विग्रह सुरक्षित बच गए थे। 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक तिवारी की पहल पर इन्हें सरकारी कोषागार में सुरक्षित रखा गया। मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद 2022 में नए मंदिर का पुनःस्थापन हुआ। पिछले वर्ष इन विग्रहों को मंदिर कमेटी को सौंपा गया था। कमेटी के सचिव गोपाल राय ने बताया कि करीब एक वर्ष तक विग्रह शिकारपुर चाय बागान प्रबंधन के पास रखे थे। भक्तों की मांग पर दुर्गापूजा से पहले इन्हें फिर स्थापित करने का निर्णय लिया गया और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के बाद इन्हें लगाया गया।

वहीं, मूर्तिकार विश्वजीत घोष ने कहा कि प्राचीन विग्रहों को विशेषज्ञों की सलाह और हेरिटेज संरक्षण के नियमों के अनुसार स्थापित किया जाना चाहिए था। राज्य हेरिटेज आयोग के पूर्व सदस्य आनंदगोपाल घोष ने भी प्राचीन धरोहरों के संरक्षण में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक महत्व वाले इन विग्रहों की स्थापना और मरम्मत में उचित संरक्षण पद्धति अपनाना जरूरी है।

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