केंद्र को बंगाल और तमिलनाडु में ‘पीएम-श्री’ योजना शुरू होने की उम्मीद सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
पश्चिम बंगाल

केंद्र को बंगाल और तमिलनाडु में ‘पीएम-श्री’ योजना शुरू होने की उम्मीद

जल्द भेजेगा पत्र

नयी दिल्ली : शिक्षा मंत्रालय पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर उनसे केंद्र की पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को राज्य के सरकारी विद्यालयों में यथाशीघ्र लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध करेगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक यह कदम हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद उठाया गया है। उनका कहना था कि चुनाव के बाद दोनों राज्यों का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है और केंद्र को उम्मीद है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)2020 से जुड़ी प्रमुख शिक्षा पहलों का क्रियान्वयन अब संभव हो सकेगा।

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक ‘पीएम-श्री’ योजना को जल्द से जल्द अपनाने के लिए ‘आज या कल’ पत्र भेजे जाएंगे, जिसके तहत चयनित विद्यालयों को एनईपी 2020 के अनुरूप आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित किया जाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि अब राज्य सरकारें पीएम श्री योजना को लागू करेंगी। हम पीएम श्री योजना को लागू करने के लिए राज्य के मुख्य सचिवों को पत्र लिखेंगे।’’

इससे पहले, पश्चिम बंगाल की तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार और तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) सरकार ने केंद्र प्रायोजित योजना में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

अधिकारियों ने संकेत दिया कि हालिया चुनावी घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में पीएम श्री योजना का कार्यान्वयन सुगम हो सकता है, जबकि तमिलनाडु में चंद्रशेखर जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) की विधानसभा चुनावों में जीत के बाद स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

पीएम श्री योजना का उद्देश्य देश भर में 14,500 से अधिक विद्यालयों को अनुकरणीय संस्थानों के रूप में विकसित करना है जो एनईपी 2020 के कार्यान्वयन को आदर्श स्वरूप को प्रस्तुत कर सकें।

इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और कई विपक्ष शासित राज्यों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी। ‘पीएम-श्री’ के कार्यान्वयन को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर न करने पर केंद्र सरकार ने 2024-25 में केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पंजाब सहित राज्यों को समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाली धनराशि रोक दी थी।

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