घोला : एक अनजान फोन कॉल ने पहले महिला को यह सोचने पर मजबूर किया कि उसके नाम पर कोई गंभीर गड़बड़ी हुई है। इसके बाद मामला एयरटेल से बैंक, बैंक से पुलिस और फिर कथित आईपीएस अधिकारी तक पहुंच गया। हर चरण में उसे ‘जांच’ का भरोसा और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। इसी दबाव में महिला ने अपनी जमा पूंजी के साथ गोल्ड लोन से जुटायी रकम भी भेज दी। कुल 62.50 लाख रुपये ट्रांसफर करने के बाद उसे समझ आया कि जिस जांच से वह डर रही थी, वह दरअसल साइबर ठगों का बिछाया जाल था। पुलिस के अनुसार, 19 अगस्त की सुबह करीब साढ़े 9 बजे रवि कुमार नामक व्यक्ति ने महिला को फोन किया। उसने खुद को एयरटेल का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उसके नाम पर एक सिम कार्ड जारी हुआ है। कुछ ही देर की बातचीत में उसने महिला के आधार दस्तावेज का हवाला देते हुए आईसीआईसीआई बैंक में उसके नाम से खाता खोले जाने की बात कही। इसके बाद बातचीत का रुख अचानक गंभीर कर दिया गया। कथित तौर पर महिला को बताया गया कि उक्त खाते में करीब 70 लाख रुपये का लेन-देन हुआ है और इसका संबंध आपराधिक गतिविधियों से है। मामला पुलिस तक पहुंचने की बात कहकर महिला को दूसरे लोगों से संपर्क कराया गया। इसके बाद वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति सामने आया, जिसने खुद को आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया। उसने कथित बैंक खाते और लेन-देन को लेकर महिला से पूछताछ की। लगातार निर्देश देकर उसे यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गयी कि वह किसी वास्तविक पुलिस जांच के घेरे में है। इसी दौरान गिरफ्तारी का डर दिखाकर उसे ‘सहयोग’ करने के लिए कहा गया। कथित तौर पर भरोसा दिया गया कि जांच में सहयोग करने पर गिरफ्तारी वारंट रद्द कराया जा सकता है और बाद में पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इस झांसे में आकर महिला ने अपनी उपलब्ध रकम के अलावा गोल्ड लोन लेकर भी पैसे जुटाये और आरटीजीएस के जरिए बताए गये खातों में रकम भेजती रही। कुल 62.50 लाख रुपये भेजने के बाद भी जब रकम वापस नहीं मिली तो महिला को संदेह हुआ। इसके बाद उसने घोला थाने में शिकायत दर्ज करायी। पुलिस ने बीएनएस की धारा के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में पुलिस कथित आरोपियों के मोबाइल नंबरों, वीडियो कॉल और उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर की गयी है।