मधुर, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्य में जल्द ही पूर्वी भारत का पहला यूटेरिन (गर्भाशय) ट्रांसप्लांट होने जा रहा है। यह घोषणा पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखोपाध्याय ने शंकर नेत्रालय द्वारा आयोजित 41वें नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के समारोह के दौरान की।
पूर्वी भारत का पहला गर्भाशय प्रत्यारोपण
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यूटेरिन ट्रांसप्लांट से संबंधित प्रक्रियाएं पिछले 15–20 वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थीं। हाल ही में उन्हें इसके पहले केस की आधिकारिक फाइल मिली है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पश्चिम बंगाल एवं पूर्वी भारत में पहली बार गर्भाशय प्रत्यारोपण किया जाएगा। यह कदम उन महिलाओं के लिए आशा की नई किरण लेकर आएगा जो बांझपन या गर्भाशय संबंधी गंभीर जटिलताओं का सामना कर रही हैं।
हैंड ट्रांसप्लांट की तैयारी भी पूरी
इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में हैंड (हाथ) ट्रांसप्लांट के लिए भी एक मामला प्रक्रियाधीन है। यह मामला सिलीगुड़ी के माध्यम से सामने आया है, जिसमें मरीज सिक्किम से संबंधित है। उन्होंने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में कुशल सर्जन और आधुनिक तकनीक मौजूद है, बस समाज में जागरूकता और प्रशासनिक तत्परता की आवश्यकता है। स्वास्थ्य मंत्री ने अवैध अंग तस्करी और बिचौलियों द्वारा गरीब लोगों को गुमराह कर अंगों के अवैध व्यापार पर सख्त रुख अपनाने की बात कही।