कोलकाता : रेलवे ट्रैक के आसपास कचरे के गलत निपटान से बढ़ते अग्नि जोखिम को देखते हुए सियालदह डिवीजन ने आम जनता और दैनिक यात्रियों से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। सूखे मौसम में आग लगने की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सियालदह डिवीजन ने स्पष्ट किया कि सूखे पत्ते, प्लास्टिक कचरा और जलती हुई सिगरेट के टुकड़े जैसे ज्वलनशील पदार्थ यदि ट्रैक पर या उसके आसपास फेंके जाते हैं, तो वे तेजी से आग पकड़ सकते हैं और बेकाबू आग में बदल सकते हैं। इससे न केवल आसपास का क्षेत्र प्रभावित होता है, बल्कि रेल संचालन भी गंभीर रूप से बाधित हो सकता है। रेलवे लाइन के पास कचरे के ढेर में आग लगाना सख्ती से प्रतिबंधित है। जमीन पर लगी आग से निकलने वाली तेज गर्मी और धुआं ओवरहेड हाई-टेंशन (OHE) तारों और संवेदनशील सिग्नलिंग उपकरणों के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं। ऐसी घटनाओं के कारण अक्सर बिजली आपूर्ति बाधित होती है, केबल क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और ट्रेनों की आवाजाही में भारी रुकावट आती है। इससे संपत्ति का नुकसान होने के साथ-साथ मानव जीवन भी जोखिम में पड़ सकता है। यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों का सुचारु संचालन सियालदह डिवीजन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। डिवीजन ने नागरिकों से अपील की है कि वे रेलवे पटरियों के पास कचरा न फेंकें और न ही उसे जलाएं। रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।