रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : करीब 20 साल पहले मध्यप्रदेश के सागर जिले से गंगासागर मेला में कपिल मुनि के दर्शन और मकर स्नान के लिए आयी रतिया देवी (72) अपने पति बालीचंद और गांव वालों के साथ मेले में आयी थी। मेले में अधिक भीड़ के कारण वह खो गई थीं। परिजनों ने उसे खूब ढूंढा, लेकिन कोई पता नहीं चला। सबने मान लिया कि वह गंगा में समा गई है। इन दिनों वेस्ट बंगाल हैम रेडियो क्लब के सचिव अंबरेष नाग विश्वास और सदस्य दिवस मंडल को बांग्लादेश से एक बूढ़ी महिला की सूचना मिली जो सिर्फ “सागर... सागर” बोलती थी। पहले सबने गंगासागर ही समझा। 18 दिन की लगातार कोशिश के बाद पता चला कि वह मध्यप्रदेश के सागर जिले की रहने वाली है। दिल्ली में काम कर रहे उसके बेटों तक बात पहुंची तो सब हैरान रह गए।
20 साल बाद जिंदा मिली माँ, बेटों की आँखें नम
रतिया देवी के तीन बेटे थे—राजेश, गणेश और पूरन। पति बालीचंद और बेटा पूरन कई साल पहले गुजर चुके हैं। यह बात खुद रतिया देवी को नहीं पता। 20 साल पुरानी फोटो धूप-धूल से इतनी खराब हो चुकी थी कि कोई पहचान नहीं पा रहा था। आखिरकार उसे ब्यूटी पार्लर ले जाकर नहलाया-धुलाया गया, साफ कपड़े पहनाए गए। फिर पुराना फोटो दिखाते ही बेटा राजेश और गांव वाले चीख पड़े—“ये तो हमारी मां हैं!” सबसे बड़ा सवाल यह था कि रतिया बांग्लादेश कैसे पहुंच गयी? संभवतः उस जमाने के अवैध ट्रॉलरों में किसी अन्य तीर्थयात्री के साथ वह सीमा पार चली गई थी। मध्यप्रदेश के बांदा थाने में उसके लापता होने की एफआईआर भी दर्ज थी। पूरी घटना की जानकारी गंगासागर मेला अधिकारी एवं एडीएम (सामान्य) अवनीत पुनिया, डीएम अरविंद कुमार मीणा और सुंदरवन पुलिस के एसपी कोटेश्वर राव को दी गई। जिला प्रशासन हर संभव मदद कर रहा है। बांग्लादेश हाई कमीशन, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखे गए हैं। दोनों देशों के दूतावासों के माध्यम से रतिया को लाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इन दिनों सागर जिले के गांव में खुशी का माहौल है। जिस मां को सब मृत मान चुके थे, वह जीवित लौटेगी। बेटा राजेश ने कहा,“मां भगवान के दर्शन को गई थीं, मुझे तो भगवान से कम कुछ नहीं मिला।”