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पश्चिम बंगाल

'बंगाल को ‘पश्चिम बांग्लादेश’ बनाने की साजिश'

तुष्टीकरण की राजनीति पश्चिम बंगाल के लिए घातक

कोलकाता : भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयानों और राज्य सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण पश्चिम बंगाल की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार की नीतियां अल्पसंख्यकों के वास्तविक विकास के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए असुरक्षा की भावना को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। भाजपा के अनुसार, पिछले एक दशक में राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए ठोस कदम उठाने में विफल रही है। पार्टी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने इस समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है, जबकि शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में तुष्टीकरण की राजनीति और कथित अवैध घुसपैठ की समस्या मिलकर पश्चिम बंगाल के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उनका दावा है कि सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या संरचना में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जानबूझकर खुली छोड़ी गई सीमाएं, सरकारी संरक्षण में हो रही घुसपैठ और अंधाधुंध तुष्टीकरण की राजनीति बंगाल के लिए घातक साबित हो सकती है। उनके अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण राज्य को एक सोची-समझी साजिश के तहत ‘पश्चिम बांग्लादेश’ में बदलने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) जैसे मुद्दों पर विरोध को बढ़ावा देकर अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने की कोशिश की है। पार्टी का कहना है कि पश्चिम बंगाल की सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और संतुलित विकास को बनाए रखने के लिए राज्य में व्यापक राजनीतिक बदलाव आवश्यक है।

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