पश्चिम बंगाल

पहाड़ से उतरता सैलाब देख थमी सांसें, सुरक्षित लौटे बशीरहाट के दंपती

चालक की सूझबूझ से बची जान


39 लापता पर्यटकों की सूची में शामिल था नाम

हावड़ा स्टेशन पर पुलिस ने किया स्वागत

बशीरहाट : चिंता, अनिश्चितता और डर के बीच आखिरकार बशीरहाट के रहने वाले अनुकूल पोद्दार और रेवा राय पोद्दार रविवार को सुरक्षित घर लौट आए। नेपाल में प्राकृतिक आपदा के दौरान मौत और तबाही का मंजर देखकर भी दोनों बाल-बाल बच गए। हालांकि घर पहुंचने के बाद भी उस भयावह घटना की यादें उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं। रविवार तड़के ट्रेन से हावड़ा स्टेशन पहुंचे दंपती को लेने बशीरहाट थाने के आईसी के नेतृत्व में पुलिस की टीम मौजूद थी। पुलिस वाहन से दोनों को उनके घर पहुंचाया गया। पड़ोसियों ने भी राहत की सांस लेते हुए फूल देकर उनका स्वागत किया। बताया गया कि 21 अगस्त को अनुकूल पोद्दार और रेवा राय पोद्दार एक ट्रैवल एजेंसी के साथ मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। आपदा वाले दिन सुबह वे काठमांडू से आगे की यात्रा के लिए निकले। करीब डेढ़ घंटे की दूरी पर रहते हुए उन्हें अचानक इलाके में तबाही की खबर मिली। दंपती के अनुसार, सुबह करीब साढ़े छह बजे वे घर से निकले थे। एक वाहन में बंगाल के पर्यटक और दूसरे में दक्षिण भारत के परिवार सवार थे। रास्ते में चालक ने दूर पहाड़ से तेज रफ्तार में नीचे आते पानी को देखा। सफेद धुएं जैसी दिखाई दे रही पानी की धार को देखकर पहले किसी को अंदाजा नहीं था कि स्थिति कितनी भयावह है। कुछ ही देर में सड़क पर अफरातफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए भागने लगे और बच्चे डर से रोने लगे। हालात बिगड़ते देख चालक ने वाहन पीछे कर लिया और दाहिनी ओर का रास्ता पकड़कर पहाड़ के ऊपरी हिस्से में सुरक्षित दूरी पर गाड़ी रोक दी। इसी बीच टूर मैनेजर का फोन आया। उन्होंने बताया कि इमिग्रेशन कार्यालय की ओर जाने वाला पुल बाढ़ में बह गया है। इसके बाद सभी को वापस काठमांडू ले जाया गया। बाद में सामने आया कि जिस इलाके से वे कुछ ही दूरी पर थे, वहां हड़पा बाढ़ से भारी तबाही हुई है। घर लौटने के बाद दंपती ने कहा कि नेपाल घूमने गए थे, लेकिन ऐसी भयावह स्थिति का सामना करना पड़ेगा, इसकी कल्पना भी नहीं की थी। अब सुरक्षित घर लौटने की खुशी के साथ उस दिन का डर भी उनके मन में बना हुआ है।

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