प्रीति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को प्रस्तावित है और सभी प्रमुख दलों ने प्रचार तेज कर दिया है। मौजूदा राजनीतिक माहौल और हालिया चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस अभी भी बढ़त बनाए हुए है, लेकिन मुकाबला पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है।
आंकड़ों में तृणमूल की बढ़त
2011 में सत्ता में आने के बाद से तृणमूल लगातार अपनी सीटें बढ़ाती रही है—2011 में 184, 2016 में 211 और 2021 में 215 सीटें। 2024 लोकसभा चुनाव के असेंबली विश्लेषण में भी पार्टी 192 सीटों पर आगे दिखी, जबकि भारतीय जनता पार्टी 90 सीटों पर बढ़त में रही। वोट शेयर के लिहाज से भी TMC (45.8%) BJP (38.7%) से आगे रही।
मुख्य मुकाबला और भाजपा की चुनौती
इस बार सीधी टक्कर तृणमूल और भाजपा के बीच मानी जा रही है। भाजपा राज्य में मुख्य विपक्ष के रूप में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश में है। हालांकि, मौजूदा आंकड़ों के आधार पर उसे सत्ता तक पहुंचना अभी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
तृणमूल के सामने चुनौतियां
तृणमूल के लिए सबसे बड़ी चिंता अल्पसंख्यक वोटों का संभावित बंटवारा है। पार्टी से निकाले गए हुमायूं कबीर अपनी नई राजनीतिक पहल के जरिए इस वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार के आरोप और शहरी वोटरों की नाराजगी भी तृणमूल के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
लेफ्ट-कांग्रेस की स्थिति
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और सीपीआई (एम) अभी भी मुकाबले में पीछे नजर आ रहे हैं। लेफ्ट ने युवा चेहरों पर दांव लगाया है, लेकिन संगठनात्मक कमजोरी उसके लिए बड़ी बाधा बनी हुई है।