अर्जुन सिंह 
पश्चिम बंगाल

लक्ष्य पर अडिग रहे अर्जुन, संघर्षों को साधकर पहुंचे मंत्री पद तक

मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलना गर्व की बात : अर्जुन

कोलकाता : महाभारत के अर्जुन की पहचान उनके अटूट संकल्प और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता से होती है। उन्हें केवल अपना लक्ष्य दिखाई देता था और उसे हासिल करने के लिए वे हर चुनौती का सामना करते थे। बंगाल की राजनीति के कद्दावर नेता अर्जुन सिंह की राजनीतिक यात्रा भी कुछ ऐसी ही रही है। यही वजह है कि पार्षद से शुरू हुआ उनका सफर अब राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने तक पहुंच गया है। अर्जुन सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। उनका पैतृक गांव भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड का केवटिया गांव है, जहां से उनका पारिवारिक जुड़ाव आज भी कायम है।

1995 में लड़ा था पार्षद का चुनाव : उत्तर 24 परगना जिले के दबंग और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले अर्जुन सिंह की छवि एक बाहुबली और जनाधार वाले नेता की रही है। उनके पिता सत्यनारायण सिंह भाटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे थे। पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अर्जुन सिंह ने महज 29 वर्ष की उम्र में राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1995 में उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ा और पहली बार जीत दर्ज की। उनके राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव भी आए। वर्ष 2000 में वाममोर्चा के शासनकाल के दौरान विक्रम विश्वास हत्याकांड में उन्हें जेल जाना पड़ा लेकिन जेल में रहते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी और वहीं से पार्षद का चुनाव लड़कर जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2001 में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर करीब 17 हजार मतों से जीतकर विधायक बने।

सीपीएम के राज में भी भारी मतो से जीता था चुनाव : 2006 में जब पूरे राज्य में वाममोर्चा की मजबूत लहर थी और सीपीएम ने 235 सीटों पर जीत दर्ज की थी, तब भी अर्जुन सिंह ने भाटपाड़ा सीट से लगभग 28 हजार मतों के अंतर से जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत का परिचय दिया। इसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पकड़ लगातार मजबूत की। वर्ष 2009 में उन्होंने दिनेश त्रिवेदी की जीत में अहम भूमिका निभाई। वहीं वर्ष 2010 में भाटपाड़ा नगरपालिका के चुनाव में जीतकर चेयरमैन बने।वर्ष 2011 और 2016 में भी उन्होंने भाटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता साबित की। वर्ष 2019 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और बंगाल की राजनीति में भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में नोआपाड़ा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार तृणांकुर भट्टाचार्य को 17,656 मतों से पराजित किया।

राजनीतिक जीवन का नया अध्याय शुरू : अब मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही उनके राजनीतिक जीवन का नया अध्याय शुरू हो गया है। लंबे राजनीतिक अनुभव के बावजूद यह पहला अवसर है जब उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला है। शपथ ग्रहण के बाद अर्जुन सिंह ने कहा कि मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब मेरे ऊपर जो जिम्मेदारी आयी है, उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाना है। पार्टी और सरकार ने जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगा।

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