निवेश और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में ठगी की आशंका
बैरकपुर : राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट इलाके में सक्रिय एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का सुराग मिलने से पुलिस सतर्क हो गई है। शुरुआती जांच में पुलिस को संदिग्ध म्यूल बैंक खातों, सिम कार्ड, पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) एजेंटों तथा एटीएम और चेक के जरिये हुई निकासी से जुड़े करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चला है। आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी कॉल और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों का शिकार बनाया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, साइबर क्राइम विंग (जिसे अब S4C नाम दिया गया है) ने पश्चिम बंगाल से मिली जानकारी के आधार पर जांच शुरू की। मामले में बैरकपुर साइबर क्राइम थाना के एसआई श्रीमंत दास की सुओ मोटो शिकायत के आधार पर गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज की गयी। पुलिस अब संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
5.78 करोड़ रुपये के म्यूल खातों का सुराग
सूत्रों के अनुसार जांच में करीब 5.78 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन वाले म्यूल बैंक खातों की जानकारी सामने आयी है। इसके अलावा करीब 36.15 लाख रुपये की चेक निकासी और 10.70 लाख रुपये की एटीएम निकासी का भी पता चला है। पुलिस ने करीब 10.81 लाख रुपये से जुड़े संदिग्ध सिम कार्ड और 4.49 लाख रुपये से संबंधित संदिग्ध पीओएस एजेंटों की जानकारी भी जुटायी है।
ठगी की रकम को खपाने में खातों के इस्तेमाल का शक
पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने और बाद में नकद निकालने के लिए इन म्यूल खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। संदिग्ध सिम कार्डों के जरिये फर्जी कॉल, एसएमएस और अन्य माध्यमों से लोगों को ठगी के जाल में फंसाये जाने की भी आशंका है। वहीं, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध पीओएस एजेंटों, बैंक खाताधारकों और सिम कार्ड धारकों के बीच क्या संबंध है।
गिरोह के जनवरी से सक्रिय होने की आशंका
पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों और जांच में सामने आये बैंक खातों व मोबाइल नंबरों का मिलान किया है। इसके आधार पर आशंका जतायी जा रही है कि यह साइबर ठगी नेटवर्क 1 जनवरी 2026 या उससे पहले से सक्रिय हो सकता है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम की ठगी की।