प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फ्रांस में आयोजित International Space Summit को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बनाया, जबकि आदित्य L-1 सूर्य के रहस्यों को समझने की दिशा में काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत के भविष्य के Space Mission का विजन भी सामने रखा—2035 तक भारतीय Space Station और 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य। उन्होंने कहा कि भारत की Space Technology का लाभ सिर्फ भारत तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना चाहिए। साथ ही ISRO के साथ भारत का Private Space Sector भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत अब सिर्फ अंतरिक्ष की खोज नहीं कर रहा, बल्कि Space का भविष्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।