अहोई अष्टमी उत्तर भारत का एक प्रमुख हिंदू पर्व है, जो संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, करवा चौथ के चार दिन बाद और दीपावली से लगभग आठ दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की रक्षा और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं तथा अहोई माता की पूजा करती हैं। परंपरागत रूप से यह व्रत पुत्रों के लिए रखा जाता था, लेकिन आज बेटियों और बेटों, दोनों की मंगलकामना के लिए किया जाता है। जानें आखिर अहोई अष्टमी की शुरुआत कैसे हुई और इस पर्व से कौन-सी पौराणिक कथा जुड़ी है? जानिए इस खास पर्व का इतिहास, महत्व और परंपराएं।