बुजुर्ग ने लगाई गुहार- 'मैं मुर्दा नहीं, जिंदा हूं...' चित्र इंटरनेट से
उत्तर प्रदेश

बुजुर्ग ने लगाई गुहार- 'मैं मुर्दा नहीं, जिंदा हूं...'

लखनऊ : समय का चक्र पूरा होने पर जब कोई इस नश्वर संसार को छोड़कर जाता है, तो दिल भारी जरूर होता है, मगर नियति के आगे कोई शिकवा नहीं रहता। लेकिन जब हमारा प्रशासनिक तंत्र ही किसी जीते-जाते इंसान को कागजों पर मृत घोषित कर दे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना और आक्रोश होना बिल्कुल लाजिमी है। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से प्रकाश में आया है। यहां एक 70 वर्षीय बेबस बुजुर्ग, जो डंडे के सहारे बमुश्किल चल पाते हैं, पिछले कई दिनों से खुद के जिंदा होने का सबूत हाथ में लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट नाप रहे हैं। तंत्र की इस घोर लापरवाही के खिलाफ न्याय पाने और खुद को कागजों में फिर से जीवित साबित करने के लिए यह बुजुर्ग लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है।

कर्मचारियों ने जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया

यह मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का है। यहां शनिवार को तहसील खागा में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग पहुंचे और DM के सामने खड़े होकर कहा- 'मैं मुर्दा नहीं, जिंदा हूं..' जिसे सुनकर डीएम भी विफर पड़ी और कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई। बुजुर्ग भूरा खागा तहसील क्षेत्र के वालीपुर एकडला गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि लेखपाल और तहसील के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से उसे सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, उसकी करीब एक बीघा दो बिस्वा जमीन दूसरे व्यक्ति के नाम वरासत भी कर दी गई।

DM से सुनाया अपना दर्द

वृद्ध भूरा ने बताया कि जब उसे इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो वह न्याय के लिए अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हो गया। कई दिनों तक भटकने के बाद खागा तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में उसने जिलाधिकारी के सामने अपनी पीड़ा सुनाई और खुद को जीवित होने का प्रमाण दिया।

डीएम ने कर्मचारियों को लगाई फटकार

वृद्ध की बात सुनकर जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स भी अचंभित रह गईं। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही वृद्ध को हरसंभव न्याय दिलाने की बात कही। इस घटना ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मामले का खुलासा न होता तो वृद्ध अपनी ही जमीन से हमेशा के लिए बेदखल हो सकता था।

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