कानपुर के वीआईपी रोड पर जल जमाव से तैरती गाड़ियां 
उत्तर प्रदेश

कानपुर से मथुरा तक मूसलाधार बारिश: सड़कों पर भरा पानी, गाड़ियां तैरती दिखीं, वीआईपी रोड धंसी

कानपुर से मथुरा तक झमाझम बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, सड़कों पर जलभराव से गाड़ियां तैरती नजर आईं, वीआईपी रोड धंसने से आवाजाही पर संकट

Amantosh

उत्तर प्रदेश में मानसून की पहली ही बारिश ने राज्य के प्रशासनिक दावों और नगर निगमों की तैयारियों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। कानपुर और मथुरा जैसे बड़े शहरों में जो स्थिति देखने को मिल रही है, वह हर साल बुनियादी ढांचे के ढहने की पुरानी कहानी को दोहराती है।

कानपुर का वीआईपी रोड, जो शहर का एक प्रमुख हिस्सा है, वहां नाले उफनने से गाड़ियां तैरती नजर आईं। हद तो तब हो गई जब कांशीराम अस्पताल और सीएमओ कार्यालय परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गए। अस्पताल में पानी भरने से गंभीर मरीजों को बेहद नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ा। शहर की गलियां और रिहायशी इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं, जिससे लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

पहली बारिश में ही स्थिति खराबः

मानसून की शुरुआत में ही कई शहरों में सड़कें धंसने लगी हैं, जो सीधे तौर पर सड़क निर्माण में हुए भ्रष्टाचार या घटिया सामग्री के इस्तेमाल और विकास कार्यों के दौरान बरती गई लापरवाही की ओर इशारा करती है। ड्रेनेज सिस्टम फेल होने के कारण प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा, जिससे दफ्तर और जरूरी कामों के लिए निकले लोग घंटों फंसे रहे।

यह पहली बार नहीं जब मानसून ने नगर निगमों के दावों की हवा निकाली होः

मानसून से पहले 'नाला सफाई' के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट जारी होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कीचड़ पूरी तरह नहीं निकाली जाती, जिससे पहली तेज बारिश में ही पानी बैक मार जाता है। कंक्रीट के बढ़ते जाल और प्राकृतिक जल निकायों व नालों पर अवैध कब्जों के कारण पानी की निकासी के रास्ते बंद हो चुके हैं। स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी अफसरों और ठेकेदारों की लापरवाही पर कोई सख्त एक्शन न होना इस समस्या को हर साल जस का तस बनाए रखता है।

पहली बारिश ने यह साफ कर दिया है कि अधिकारी केवल 'कागजी तैयारियों' में व्यस्त थे। जब तक ड्रेनेज सिस्टम का स्थायी समाधान और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता को मानसून राहत के बजाय आफत ही नजर आता रहेगा।

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