रायबरेली : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि अगर शिक्षा और रोजगार से जुड़ी व्यवस्था छात्रों और नौजवानों को केंद्र में न रखकर निजीकरण पर जोर देती है, तो उस व्यवस्था को बदला जाएगा।
अपनी ‘जेन-जी महाजुटान यात्रा’ के तहत रायबरेली पहुंचीं बोरा ने कहा कि उनके इस अभियान का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में छात्रों और युवाओं की समस्याओं को उठाना है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का मकसद उन छात्र-छात्राओं की आवाज को एक मंच पर लाना है जो स्कूलों में बेंच और लैब, विश्वविद्यालयों में छात्रवृत्ति और छात्रावास जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसका एक मकसद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में ऐसे छात्रों की मदद करना है।
बोरा ने कहा, हमने यह यात्रा प्रयागराज से शुरू की और वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, फैजाबाद और लखनऊ से होते हुए आज रायबरेली पहुंचे हैं। राज्य भर में विद्यार्थी और युवा अलग-अलग तरह के संघर्षों से जूझ रहे हैं और उनका संगठन उनके साथ खड़ा होकर उनकी आवाज को बुलंद करना चाहता है।
बोरा ने कहा कि शिक्षा और रोजगार में निजीकरण पर ध्यान देने के बजाय छात्रों और युवाओं को केंद्र में रखा जाना चाहिये। अगर शिक्षा और रोजगार संबंधी व्यवस्था छात्रों और युवाओं को केंद्र में नहीं रखती और इसके बजाय निजीकरण को केंद्र में रखती है, तो उस व्यवस्था को बदला जाएगा।
बोरा ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय करने के लिए जिम्मेदार लोगों को बदलना होगा। 'महाजुटान यात्रा' नौ अगस्त को इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुई थी और तब से यह अलग-अलग जिलों से गुजर रही है।
नेहा इस साल की शुरुआत में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरी थीं, जहां उन्होंने परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर 23 दिन की भूख हड़ताल की थी और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।