लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अमेठी जिले में मसौदा मतदाता सूची में नाम शामिल होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची से 138 लोगों के नाम हटाए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने अमेठी जिले की महमूदपुर बेनीपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत गोपालपुर गांव के 138 निवासियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। इस मामले में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नाम हटाने से पहले उन्हें कोई नोटिस भी नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके नाम लगभग एक दशक से मतदाता सूची में शामिल थे। इसके अलावा, मसौदा मतदाता सूची में भी उनके नाम दर्ज थे, लेकिन अंतिम सूची प्रकाशित होने पर वे गायब मिले।
अदालत ने नौ अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूछा था कि किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत इन मतदाताओं के नाम हटाए गए।
पीठ ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब संबंधित लोगों के नाम पहले की मतदाता सूचियों और मसौदा सूची में शामिल थे, तो अंतिम सूची के प्रकाशन के समय उन्हें किस आधार पर हटा दिया गया। अदालत ने यह भी सवाल किया कि संबंधित मतदाताओं को पूर्व सूचना दिए बिना ऐसा कैसे हटाया जा सकता है।
राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच करने और संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया था।
अदालत ने पहले मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी। साथ ही संकेत दिया था कि यदि संतोषजनक जानकारी नहीं मिली तो संबंधित अधिकारी को तलब किया जा सकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिये 29 अक्टूबर की तारीख नियत की है।