लखनऊ: राजधानी लखनऊ में नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर शादी के नाम पर दूसरे राज्यों में भेजने और पैसों के बदले उनकी सौदेबाजी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले में फरार चल रहे एक दंपती को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा लड़कियों को निशाना बनाकर उन्हें शादी का झांसा देता था और बाद में मोटी रकम लेकर उनकी शादी कराता था।
मोहनलालगंज कोतवाली क्षेत्र की एक बुजुर्ग महिला ने 12 मई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि उनकी दिवंगत बेटी की दो नाबालिग बेटियां उनके साथ रहती थीं, जिन्हें एक रिश्तेदार और उसकी सहयोगी बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए हैं।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और चार विशेष टीमों का गठन किया।
जांच के दौरान पुलिस ने क्षेत्र के करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। लगातार तलाश और तकनीकी निगरानी के बाद 18 मई को दोनों नाबालिग बच्चियों को सकुशल बरामद कर लिया गया।
पूछताछ और जुटाए गए साक्ष्यों से पता चला कि बच्चियों को राजस्थान ले जाकर शादी के नाम पर बेचने की तैयारी की जा रही थी।
जांच में रायबरेली निवासी भूपेंद्र चौहान और उसकी पत्नी सोनम कुमारी की भूमिका सामने आई। पुलिस को शुरुआती दौर में दोनों की लोकेशन रायबरेली के आसपास मिली, लेकिन मोबाइल फोन बंद होने के कारण वे गिरफ्त से बाहर रहे।
बाद में तकनीकी सर्विलांस के जरिए दोनों की मौजूदगी राजस्थान के कोटा में मिली। इसके बाद मोहनलालगंज पुलिस की टीम राजस्थान पहुंची और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक गिरोह के कुल छह सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले अनुराग यादव, प्रिया पटेल, मोहम्मद अख्तर और एक नाबालिग को पकड़ा गया था। अब भूपेंद्र चौहान (23) और उसकी पत्नी सोनम कुमारी (20) की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने गिरोह की महत्वपूर्ण कड़ी को भी दबोच लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच केवल अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाने तक सीमित नहीं है। यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या अन्य राज्यों में भी इसी तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसके साथ ही संभावित मानव तस्करी और बाल विवाह से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। वहीं, बच्चियों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।