मथुरा : कृष्ण जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए प्रस्तावित ‘शंखनाद’ और ‘कारसेवा’ से पहले मथुरा जिला प्रशासन ने गोवर्धन में नयी धार्मिक परंपराएं शुरू करने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगा दी है। पुलिस अधिकारियों ने रविवार को बताया कि प्रशासन की यह कार्रवाई विवादित स्थल के संबंध में उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद की गई है।
पुलिस अधीक्षक (नगर) राजीव कुमार सिंह ने वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिले में किसी भी प्रकार की नयी परंपरा शुरु करने पर पूरी तरह से रोक है।
उन्होंने कहा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कथित रूप से मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा की घोषणा करने वालों ने जाने-माने लोगों और साधु-संतों से शंखनाद कार्यक्रम में भाग लेने का आह्वान किया था। लेकिन, हम उस ओर जाने वाले सभी लोगों को रोककर उनके थाना क्षेत्र में वापस भेजने का काम कर रहे हैं।
सिंह ने कहा है कि उन्होंने सभी संबंधित संगठनों और व्यक्तियों को न्यायालय के आदेशों और निर्देशों से अवगत करा दिया है। सभी लोग उनके संपर्क में हैं और सभी ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करने का आश्वासन भी दिया है।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने साध्वी ऋतंभरा, देवकीनंदन ठाकुर, महंत फूलडोल बिहारीदास, श्रीचरणदास, सौरभ गौड़, सीताराम दास, अभिषेक ब्रह्मचारी, मोहिनी बिहारी शरण और महामंडलेश्वर कृष्णानंद सहित 12 संतों और धार्मिक हस्तियों को नोटिस जारी किया है।
सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग जानकारी न होने या अज्ञानता के कारण उस इलाके में जाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें हालात के बारे में बताया गया और सम्मानपूर्वक वापस भेज दिया गया।
गोवर्धन क्षेत्र में राधाकुंड के पास जुल्हेंदी गांव स्थित श्री चित्रगुप्त पीठ के अध्यक्ष स्वामी डॉ. सच्चिदानंद ने चार जुलाई को घोषणा की थी कि नौ अगस्त को कृष्ण जन्मस्थान पर कारसेवा की जाएगी। उन्होंने संतों और सनातन परंपरा के अनुयायियों से बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की थी।
मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि विवाद हिंदू पक्ष के इस दावे से जुड़ा है कि भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर बनाया गया था और इस स्थल के एक हिस्से पर शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है, जिसका (मस्जिद का) निर्माण एक मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।