मोईद खान 
उत्तर प्रदेश

अयोध्या सामूहिक दुष्कर्म मामला : सपा नेता को बरी करने के फैसले को चुनौती देगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही

अयोध्या : सामूहिक दुष्कर्म मामले में अयोध्या की एक विशेष अदालत द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मोईद खान को बरी किए जाने को फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। यह जानकारी शनिवार को एक विशेष लोक अभियोजक ने दी।

पीड़िता की मां ने खान को बरी किए जाने के लिए पुलिस जांच में लापरवाही और ‘ DNA’ रिपोर्ट में हेरफेर का आरोप लगाया।

विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि अभियोजन पक्ष मोईद खान को बरी करने के स्थानीय पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेगा। उन्होंने कहा कि हम इस मामले में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) निरुपमा विक्रम की अदालत ने यह कहते हुए मोईद खान को बरी कर दिया था कि ‘DNA’ रिपोर्ट सहित सभी सबूतों से उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं होते।

हालांकि, अदालत ने मोईद के घरेलू सहायक राजू खान को दोषी ठहराया और भ्रूण के ‘डीएनए’ से मिलान होने के बाद उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीड़िता की मां ने पुलिस जांच में लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि चूक के कारण सपा नेता को बरी कर दिया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘डीएनए’ रिपोर्ट में हेरफेर किया गया। राजू की सजा पर उन्होंने कहा कि 20 साल का कठोर कारावास काफी नहीं है और उन्होंने उसके लिए मृत्युदंड की मांग की।

इस बीच, मोईद खान के बेटे जहीर खान ने कहा कि परिवार उच्च न्यायालय में ‘जोरदार पैरवी’ करने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने दावा किया कि लगभग 50 दुकानों वाला बहुमंजिला वह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स उनके पिता का नहीं बल्कि ब्रिटेन में रहने वाले उनके चाचा असगर अली का था। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स ध्वस्त कर दिया था।

उन्होंने कहा, बुलडोजर कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी जाएगी। सामूहिक दुष्कर्म मामले के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।जहीर खान ने इस मामले के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पिता का नाम शुरुआती प्राथमिकी में नहीं था और बाद में जोड़ा गया।

उन्होंने यह भी कहा कि घटना का वीडियो बनाए जाने का आरोप लगाया गया था, लेकिन मुकदमे के दौरान ऐसा कोई वीडियो सबूत के रूप में पेश नहीं किया गया। जहीर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता संकट के समय परिवार का समर्थन करने के लिए आगे नहीं आए।

उन्होंने दावा किया कि अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव में से किसी ने भी घटना के बाद परिवार से मुलाकात नहीं की और न ही कोई सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा, अदालत ने मेरे पिता को बरी कर दिया है, लेकिन आज भी हमें लोगों को यह विश्वास दिलाना पड़ता है कि उन्होंने अपराध नहीं किया। अगर वह निर्दोष हैं, तो उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला कैसे दर्ज किया गया ?

अधिकारियों ने बताया कि सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बरी होने के बावजूद, मोईद खान गैंगस्टर एक्ट के तहत एक अलग मामले में जेल में बंद हैं। यह मामला 2024 में एक 12 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित है, जिसका खुलासा तब हुआ जब चिकित्सा जांच के दौरान वह गर्भवती पाई गई। इसके घटना के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

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