इलाहाबाद हाई कोर्ट 
उत्तर प्रदेश

इलाहाबाद HC ने धोखाधड़ी के आरोपी अधिवक्ता को जमानत देने से किया इनकार

कहा- यह न्याय व्यवस्था के साथ गंभीर धोखाधड़ी का मामला है

प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंटरमीडिएट के फर्जी अंक पत्र के आधार पर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकरण कराने के आरोपी अधिवक्ता को जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने अधिवक्ता आशीष शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि यह न्याय व्यवस्था के साथ गंभीर धोखाधड़ी का मामला है।

न्यायमूर्ति ने कहा, एक अधिवक्ता, अदालत का अधिकारी होता है और जब वह स्वयं ऐसी गैर कानूनी गतिविधि का सहारा लेता है तो यह न्याय व्यवस्था के साथ गंभीर और जानबूझकर की गई धोखाधड़ी का मामला बनता है।

अदालत ने कहा,कानून का पालन करने वालों के लिए उनके शब्दों से कहीं अधिक उनका आचरण महत्वपूर्ण है। एक अधिवक्ता मुकदमे में शामिल महज एक पेशेवर नहीं होता बल्कि वह न्याय के प्रशासन में एक महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। यह अदालत इस प्रकृति के मामलों में नरमी नहीं दिखा सकती।

न्यायमूर्ति ने कहा, इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की अनुचित सहानुभूति, कानूनी पेशे की पवित्रता और विश्वसनीयता से समझौता करने के समान होगा।

याचिकाकर्ता ने तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल करना) के तहत दर्ज मामले में जमानत के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

एक अन्य अधिवक्ता द्वारा कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से की गई शिकायत के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शुक्ला ने पंजीकरण कराने के लिए जाली शैक्षणिक प्रमाण पत्र दाखिल किये हैं।

शुक्ला ने 1994 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने का दावा किया था हालांकि, यूपी बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चला कि वह उस परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि बार बार नोटिस दिए जाने के बावजूद वह जांच अधिकारी के समक्ष 12वीं उत्तीर्ण का प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका और दावा किया कि प्रमाण पत्र कहीं गुम हो गया है।

कानपुर के सत्र न्यायाधीश ने जांच अधिकारी के समक्ष प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहने पर पिछले वर्ष नवंबर में शुक्ला की अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी थी, जिसके बाद दिसंबर में उसे नैनीताल से गिरफ्तार कर लिया गया था।

अदालत ने 6 फरवरी को दिए आदेश में याचिकाकर्ता की यह दलील खारिज कर दी कि दीमक ने उसका 12वीं का प्रमाण पत्र नष्ट कर दिया।

SCROLL FOR NEXT