उत्तर प्रदेश

27 साल पुराने केस में दोषी को मिली अनोखी सजा : अदालत उठने तक खड़ा रहने का आदेश

आर्थिक तंगी और बीमारी का हवाला देकर दोष स्वीकारने वाले 65 वर्षीय राजेंद्र को कोर्ट ने प्रतीकात्मक सजा देकर 10 दिन की संभावित जेल से दी राहत

बागपत : बागपत की एक कोर्ट ने करीब 27 वर्ष पुराने आपराधिक मामले का निस्तारण करते हुए 65 वर्षीय दोषी को अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक वहां खड़े रहने की सजा सुनाई और उस पर 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

अभियोजन अधिकारी अभिराम गौतम ने सोमवार को बताया कि सरूरपुर कलां गांव निवासी धारा सिंह ने 26 जून 1999 को गांव के ही राजेंद्र समेत 3 लोगों के खिलाफ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए बागपत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया था।

राजेंद्र के खिलाफ मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीन्द्रपाल सिंह की अदालत में विचाराधीन था। लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं होने पर उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। बाद में कुर्की नोटिस और कुर्की वारंट भी जारी किए गए।

शनिवार को राजेंद्र ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। उसने अदालत को बताया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है तथा वृद्धावस्था और बीमारी के कारण नियमित रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हो सका। आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कम से कम जुर्माने के साथ करने का अनुरोध किया।

सुनवाई के बाद कोर्ट ने राजेंद्र को उस दिन की कार्यवाही समाप्त होते तक अदालत में उपस्थित रहने की सजा सुनाई और कुल 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें गाली-गलौज के जुर्म में 300 रुपये तथा धमकी देने के जुर्म में 700 रुपये का जुर्माना शामिल है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को 10 दिन का कारावास भुगतना होगा।

अभियोजन अधिकारी के अनुसार, राजेंद्र ने निर्धारित जुर्माना जमा कर दिया और सजा की अवधि पूरी होने के बाद अपने घर लौट गया।

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