ममता बनर्जी की ओर से तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर निर्वाचन आयोग की अंतरिम रोक के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई हो सकती है। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। हालांकि, अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है और अदालत ने निर्वाचन आयोग के आदेश पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी है।
ममता बनर्जी ने 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका में निर्वाचन आयोग के 17 सितंबर के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर दावे को लेकर चल रहे विवाद के बीच दोनों पक्षों को ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था।
निर्वाचन आयोग ने कहा था कि पार्टी पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के दावों पर विस्तृत प्रक्रिया के तहत फैसला करना जरूरी है। लेकिन पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव के लिए समय कम होने के कारण आयोग ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू की। दोनों गुटों से अलग-अलग नाम और मुक्त चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए।
इसके बाद आयोग ने दोनों पक्षों के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न तय किए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी वाला चिह्न दिया गया, जबकि दूसरे गुट को ‘लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चिह्न आवंटित किया गया। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए है और आयोग के अंतिम फैसले तक लागू रहेगी।
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सामने आया है। इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है। निर्वाचन आयोग के सामने दोनों पक्षों ने पार्टी के संगठन और नियंत्रण को लेकर अपने-अपने दावे रखे हैं। आयोग ने कहा है कि इस विवाद का अंतिम फैसला संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बाद किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को कपिल सिब्बल ने आयोग के अंतरिम आदेश और उसके समय का मुद्दा उठाते हुए मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। अब अदालत की ओर से याचिका को सूचीबद्ध किए जाने और सुनवाई की तारीख तय होने का इंतजार है। फिलहाल आयोग का अंतरिम आदेश लागू है।