केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
श्रीनगर : पुलिस ने मंगलवार को बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए कई स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है और इसकी प्रभावशीलता को परखने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को सम्मिलित करते हुए एक ‘मॉक ड्रिल’ की गई। कश्मीर में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर की 57 दिनों तक जारी रहने वाली सालाना यात्रा तीन जुलाई से दो रास्तों से शुरू होने वाली है। यह अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले में छोटे, लेकिन खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से होगी।
तीर्थयात्रियों का पहला जत्था दो जुलाई को होगा रवाना
तीर्थयात्रियों का पहला जत्था दो जुलाई को जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से रवाना होगा। कश्मीर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक वी.के. बिरदी ने पत्रकारों को बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा के कई स्तरीय उपाय लागू किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सभी सुरक्षाकर्मियों को उनकी भूमिकाओं के बारे में स्पष्टता रहे, इसके लिए हम पूरी तैयारी के साथ अभ्यास और ‘मॉक ड्रिल’ कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि अगर कोई आपात स्थिति आती है, तो हर सुरक्षा बल उसे ठीक से संभाल सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने को प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल
बिरदी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस बार भी जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूरे मार्ग पर सीसीटीवी निगरानी कैमरों का एक नेटवर्क लगाया है। इसमें पहचान करने वाली विशेषताएं हैं जिनसे प्रणाली में प्रवेश करने वाले किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो जाएगी ताकि वहां तैनात सुरक्षा बल उन्हें उस इलाके से हटा सकें या स्थिति को संभाल सकें।’’
आपदा प्रबंधन अभ्यास
उन्होंने कहा, ‘‘एनडीएमए सभी संबंधित पक्षों जैसे जम्मू-कश्मीर पुलिस, अर्धसैनिक बल और स्थानीय जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ मिलकर बैठक आधारित आपदा प्रबंधन अभ्यास करता है। वे भूस्खलन और हिमस्खलन की आशंका वाले इलाकों और ग्लेशियर संबंधी विशेषताओं आदि की ‘मैपिंग’ करते हैं। इसके आधार पर पर्वतीय बचाव दल तैनात किये जाते हैं ताकि मौसम से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति से ठीक से निपटा जा सके।’’ श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जी.वी. संदीप चक्रवर्ती ने बताया कि श्रीनगर पुलिस ने नागरिक विभागों, सुरक्षा शाखा, यातायात शाखा, अर्धसैनिक बल, अग्निशमन और आपात सेवा, एसडीआरएफ और अन्य सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर एक व्यापक ‘मॉक ड्रिल’ की।