केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दूसरे मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी है। अठावले ने कहा कि दीपके और उनकी पार्टी को हर मुद्दे पर इस्तीफे की मांग करने के बजाय अन्य सामाजिक समस्याओं पर भी काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दोबारा प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं थी।
अठावले ने कहा कि दीपके महाराष्ट्र से आते हैं और दलित तथा बौद्ध समुदाय से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि दीपके ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर पहले आंदोलन किया था, लेकिन अब मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर फिर से प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं थी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर एकमत नहीं है। उनके मुताबिक, अलग-अलग नेता इस विषय पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे और चुनाव आयोग मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए तैयार है।
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी की आपत्ति निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से गरीबों, प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के मताधिकार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही करने और मृत, दोहरे तथा अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
अठावले ने सीजेपी से प्रदर्शन के दौरान शांति बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि आंदोलन करना हो तो शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी करते समय भाषा का ध्यान रखने की सलाह दी।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच अठावले की टिप्पणी ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम दिया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियां तथा आयोग का पक्ष अलग-अलग बने हुए हैं।