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ZSI ने पूर्वी हिमालय में नई हेक्सापॉड प्रजाति की खोज की

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : भारतीय टैक्सोनॉमी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India - ZSI) के वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालय में Diplura नामक प्राचीन, पंखहीन और मिट्टी में रहने वाले हेक्सापॉड्स की नई प्रजाति की खोज की है। नई प्रजाति का नाम Lepidocampa sikkimensis रखा गया है, और यह पहली बार है कि किसी भारतीय शोध दल ने इस प्राचीन सूक्ष्म-कीट समूह के सदस्य की पहचान और औपचारिक वर्णन किया। इस खोज के परिणाम 7 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय टैक्सोनॉमिक जर्नल Zootaxa में प्रकाशित हुए, जिससे भारतीय Diplura पर लगभग 50 साल के अनुसंधान अंतराल का अंत हुआ। हालांकि भारत से पहले 17 Diplura प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया था, सभी विदेशी शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था। ZSI के निदेशक धृति बनर्जी ने इस खोज को भारत की मिट्टी जैव विविधता का “महत्वपूर्ण योगदान” बताया। उन्होंने कहा कि कम ज्ञात और विकासवादी दृष्टि से महत्वपूर्ण समूहों जैसे Diplura पर अनुसंधान, विशेषकर हिमालय जैसे जैव विविधता हॉटस्पॉट में, पारिस्थितिकी तंत्र की कार्यप्रणाली समझने के लिए आवश्यक है। शोध दल का नेतृत्व सुरजीत कर ने किया और इसमें सौविक मजूमदार, प्रीथा मंडल, गुरु पड मण्डल और कुसुमेन्द्र कुमार सुमन शामिल थे। टीम ने यह प्रजाति सिक्किम के रावांगला के पास संग्रहित नमूनों से पहचानी। बाद में अतिरिक्त नमूने बंगाल के कर्सियांग में भी मिले, जो पूर्वी हिमालय क्षेत्र में इस प्रजाति के व्यापक वितरण को दर्शाते हैं। यह प्रजाति अपनी विशिष्ट शरीर की स्केल व्यवस्था, अलग ब्रिसल पैटर्न और विशेष अंग संरचनाओं से पहचानी जाती है।

Blind और मिट्टी में रहने वाले Diplura, जिन्हें आमतौर पर दो-कांटेदार ब्रिसलटेल कहा जाता है, पोषक तत्वों के चक्रण और मिट्टी की संरचना बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वैश्विक स्तर पर पहली बार, इस अध्ययन में भारतीय Lepidocampa प्रजाति का DNA बारकोड डेटा भी उपलब्ध कराया गया, जो पारंपरिक रूपिकी (morphology) को आधुनिक आणविक फ़ाइलोजेनेटिक्स से जोड़ता है। इसके साथ ही, दल ने लगभग पांच दशक बाद दुर्लभ उप-प्रजाति Lepidocampa juradii bengalensis को भी पुनः खोजा।

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