सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : 58 वर्षीय व्यवसायी और सामाजिक कार्यकर्ता व सेंट स्टीफेंस स्कूल के मानद सचिव इमरान जाकी का नाम चुनाव से पहले संशोधित मतदाता सूची से हटा दिया गया, जिससे वे गहरे सदमे और पीड़ा में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उनकी भारतीय नागरिकता ही संदिग्ध हो गई है, जबकि उनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट है और उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे। पश्चिम बंगाल में ऐसे लाखों लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिनमें कई वंचित वर्गों से हैं। जाकी, जो चौरंगी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता थे, ने बताया कि बीएलओ ने उनके नाम में “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” बताई, लेकिन इसका स्पष्ट कारण नहीं दिया। वे समझ नहीं पा रहे कि उन्हें 29 अप्रैल को मतदान से वंचित क्यों किया गया।
उनके 81 वर्षीय पिता का नाम भी सूची से हटा दिया गया है, जिससे वे बेहद आहत हैं, जबकि उनके भाइयों के नाम सूची में बने हुए हैं। जाकी संबंधित न्यायिक अधिकारी से मिलकर जवाब मांगना चाहते हैं और अपने पासपोर्ट सहित सभी प्रमाण दिखाना चाहते हैं। विडंबना यह है कि वे पहले चुनाव आयोग के मतदाता जागरूकता अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं और हमेशा मतदान करते आए हैं।
वे खुद को धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भारत का समर्थक बताते हैं और मानते हैं कि यह प्रक्रिया विभाजनकारी और पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती है। उनके अनुसार, उनके पूर्वजों ने भारत को चुना था और उनका परिवार पीढ़ियों से यहां सम्मानपूर्वक रह रहा है। वे कई सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े हैं तथा सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित भी हो चुके हैं। अब वे अपना नाम पुनः जोड़ने के लिए अपील करेंगे, लेकिन इस चुनाव में मतदान न कर पाने की आशंका से वे बेहद दुखी और निराश हैं।