नयी दिल्ली : औसत जीवन प्रत्याशा में लगातार वृद्धि, तेजी से बढ़ती बुजुर्गों की आबादी और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की चुनौती के बीच, इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का विषय ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ रखा गया है। इसका उद्देश्य योग को दीर्घायु, शारीरिक सक्रियता और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के प्रभावी साधन के रूप में स्थापित करना है।
दुनिया भर में 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के 12वें संस्करण के विषय का अनावरण केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने इस महीने खजुराहो के स्मारक समूह में आयोजित ‘योग महोत्सव : आईडीवाई 2026 के लिए 25-दिवसीय उलटी गिनती’ के दौरान किया।
जैसे-जैसे जीवन प्रत्याशा बढ़ती जा रही है, यह आवश्यक हो जाता है कि हम गरिमापूर्ण और स्वस्थ तरीके से वृद्धावस्था व्यतीत करने की कला सीखें-केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव
विषय की घोषणा करते हुए जाधव ने कहा, “यह विषय आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है। जैसे-जैसे जीवन प्रत्याशा बढ़ती जा रही है, यह आवश्यक हो जाता है कि हम गरिमापूर्ण और स्वस्थ तरीके से वृद्धावस्था व्यतीत करने की कला सीखें - एक ऐसी अवधारणा जिसका सुंदर उदाहरण भारत की प्राचीन सभ्यता में मिलता है, जहां हमारे ऋषियों और योगियों ने योग और आध्यात्मिक अनुशासन की शक्ति के माध्यम से दीर्घायु और जीवंत स्वास्थ्य को बनाए रखा।”
आयुष मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह विषय न केवल एक स्वास्थ्य दर्शन को दर्शाता है, बल्कि एक अत्यावश्यक वैश्विक आवश्यकता को भी प्रदर्शित करता है, क्योंकि दुनिया भर के देश बढ़ती जीवन प्रत्याशा के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का सामना कर रहे हैं।
यह योग को लंबी उम्र और जीवन की गुणवत्ता के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित करता है, जो लोगों को गरिमा, गतिशीलता, मानसिक दृढ़ता और सामाजिक जुड़ाव के साथ वृद्धावस्था व्यतीत करने में सक्षम बनाता है। स्वस्थ वृद्धावस्था में योग की भूमिका की बढ़ती वैज्ञानिक स्वीकृति वैश्विक अनुसंधान प्रवृत्तियों से स्पष्ट है।