मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 
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हटाए जा सकते हैं 1.20 करोड़ नाम: ममता

वोटाधिकार पर संकट? सीएम ने जताई आशंका

कोलकाता: भवानीपुर में जैन धर्म के पवित्र ‘मानस स्तंभ’ के उद्घाटन मंच से राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान आम लोगों के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए लाखों लोगों के मताधिकार छीनने की साजिश चल रही है और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित होकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी तरह गैरकानूनी और गोपनीय तरीके से राज्य के लगभग 1 करोड़ 20 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि इसी कारण वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। इसके बावजूद आम लोगों की परेशानी को लेकर वह आश्वस्त नहीं हैं।

धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने अहिंसा के प्रतीक मानस स्तंभ के सामने प्रार्थना भी की। SIR प्रक्रिया में लापरवाही और धांधली का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने विस्तृत आंकड़े पेश किए। उनके अनुसार, पहले 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए थे।

इसके बाद ‘लॉजिस्टिक डिस्क्रिपेंसी’ का हवाला देकर करीब 80 लाख और नाम गुपचुप तरीके से हटाने की प्रक्रिया चल रही है। उनका दावा है कि यदि इनमें से 20 लाख मृत व्यक्तियों का आंकड़ा भी मान लिया जाए, तब भी कम से कम 1 करोड़ 20 लाख वैध मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं।

जिनके पास सभी वैध दस्तावेज हैं और जिनका सत्यापन पूरा हो चुका है, उनके नाम भी हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद अब तक सुधार का काम शुरू नहीं हुआ है। आगामी 28 तारीख को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर कई लोग अपना नाम न देखकर चिंतित होंगे।

सीएम ने कहा कि उनके लिए यह मायने नहीं रखता कि कौन तृणमूल, कौन किस पार्टी का समर्थक है। उनका लक्ष्य है कि लोकतंत्र सुरक्षित रहे और आम जनता के अधिकार अक्षुण्ण रहें। मताधिकार छीनने के किसी भी प्रयास के खिलाफ वे अंत तक संघर्ष करेंगी।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसा और सत्य की नीति को याद करते हुए “जियो और जीने दो” का संदेश दिया तथा जैन समुदाय के पारंपरिक अभिवादन “जय जिनेंद्र” के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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