विश्व बैंक ने वर्ष 2031 तक चीन को दिए जाने वाले सभी कर्ज पूरी तरह बंद करने की योजना बनाई है 
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2031 तक चीन को कर्ज देना बंद करेगा विश्व बैंक, बदलेगी वैश्विक विकास की दिशा

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने चीन को बाहरी ऋण की जरूरत नहीं, 2031 के बाद विश्व बैंक फोकस करेगा कम आय वाले देशों और जलवायु जैसी वैश्विक चुनौतियों पर

नई दिल्ली : विश्व बैंक ने वर्ष 2031 तक चीन को दिए जाने वाले सभी कर्ज पूरी तरह बंद करने की योजना बनाई है। यह फैसला चीन की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक विकास प्राथमिकताओं में आए बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

चीन को मिलने वाली विश्व बैंक की सालाना ऋण सहायता पिछले कुछ वर्षों से लगातार घट रही है। वर्ष 2017 में जहां यह करीब 2.4 अरब डॉलर थी, वहीं 2025 तक इसके लगभग 75 करोड़ डॉलर रह जाने का अनुमान है। विश्व बैंक का मानना है कि चीन अब इतना सक्षम हो चुका है कि उसे विकास परियोजनाओं के लिए बाहरी कर्ज की जरूरत नहीं है।

चीन बना दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

चीन 1980 में विश्व बैंक का सदस्य बना था। उस समय उसे बुनियादी ढांचे, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों के विकास के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। लेकिन पिछले चार दशकों में वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अब चीन खुद बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई), एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) जैसे मंचों के जरिए अन्य देशों को कर्ज उपलब्ध करा रहा है।

गरीब और विकासशील देशों को मिलेगी मदद

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले के पीछे आर्थिक कारणों के साथ राजनीतिक पहलू भी हैं। अमेरिका सहित कई देशों का लंबे समय से कहना रहा है कि विश्व बैंक के संसाधनों का उपयोग मुख्य रूप से गरीब और विकासशील देशों के लिए होना चाहिए, न कि चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए।

चीन के साथ तकनीकी सहयोग जारी रहने की उम्मीद

विश्व बैंक के इस कदम से अफ्रीका, दक्षिण एशिया और छोटे द्वीपीय देशों जैसे कम आय वाले देशों को अधिक वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों पर विश्व बैंक और चीन के बीच तकनीकी सहयोग आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

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