लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से जुड़े तीन अहम विधेयक विपक्ष के विरोध के बीच पेश किए गए। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ पेश किए, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ सदन में रखा।
‘संविधान संशोधन विधेयक’ को पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट पड़े, जबकि 185 सदस्यों ने इसका विरोध किया।
विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो चुका है, फिर इसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने सरकार पर 2029 के चुनाव को ध्यान में रखकर कदम उठाने का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने भी विधेयकों को जल्दबाजी में लाने पर सवाल उठाए। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इससे हिंदी पट्टी का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा का अवसर दिया जाएगा और सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी स्पष्ट किया कि विधेयकों पर विस्तृत चर्चा के दौरान सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा।
सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ये तीनों विधेयक एक साथ लाना जरूरी है, जबकि विपक्ष इसे संघीय ढांचे और संविधान की भावना के खिलाफ बता रहा है।