गृहमंत्री अमित शाह कोल्लम में सहकारी क्षेत्र की परियोजनाओं के उद्धाटन कार्यक्रम में दीप जलाते हुए 
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सहकारिता के जरिये महिला सशक्तीकरण सरकार का प्रमुख उद्देश्य : शाह

कोल्लम में सहकारी क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का उद्घाटन

Kamlesh Pandey

कोल्लम (केरल): केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सहकारी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

शाह ने केरल के कोल्लम जिले के कुंडारा में राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड (NCCF) के तहत सहकारी क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण को मजबूत करने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन किया।

सहकारिता मंत्रालय के गठन को बताया बड़ा कदम

अमित शाह ने कहा कि देश में किसान और सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोग आजादी के बाद से ही अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन की मांग करते रहे थे। उनके अनुसार, लंबे समय तक यह मांग पूरी नहीं हुई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया।

उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन से ग्रामीण विकास, कृषि विकास और महिला सशक्तीकरण को एक नई दिशा देने का प्रयास किया गया है। शाह ने सहकारी संस्थाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, आय और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

ग्रामीण विकास और कृषि के साथ महिलाओं को जोड़ने पर जोर

शाह ने कहा कि सहकारिता केवल कृषि और किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को मजबूत किया जा सकता है। महिलाओं को सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलती है।

‘मातृशक्ति’ के सशक्तीकरण के लिए प्रयासों का उल्लेख

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10-12 वर्षों के दौरान महिलाओं को आगे बढ़ाने और उनके सशक्तीकरण के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने महिला श्रमिकों के लिए उपलब्ध कराई गई विभिन्न सुविधाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी 2014-15 के 23 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है।

36 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुलने का दावा

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग 36 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए हैं। उन्होंने इसे महिलाओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

बैंक खातों के माध्यम से महिलाओं को सरकारी योजनाओं के लाभ सीधे प्राप्त करने, बचत करने और वित्तीय लेनदेन करने में सुविधा मिलने की बात भी उन्होंने कही।

‘तीन तलाक’ का जिक्र, मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात

अमित शाह ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने ‘तीन तलाक’ पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया।

उन्होंने इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं के लिए समान अधिकार और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

बिना पुरुष साथी के हज की सुविधा का उल्लेख

शाह ने कहा कि पहले मुस्लिम महिलाओं को अकेले हज करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन अब वे बिना किसी पुरुष साथी के भी हज की यात्रा कर सकती हैं।

उन्होंने इसे मुस्लिम महिलाओं के लिए धार्मिक यात्रा से जुड़ी सुविधा और उनके अधिकारों के विस्तार के रूप में प्रस्तुत किया।

सशस्त्र बलों में 11 हजार से अधिक महिला अधिकारियों का उल्लेख

केंद्रीय गृह मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय सशस्त्र बलों में 11,000 से अधिक बेटियां अधिकारी के रूप में सेवा दे रही हैं।

शाह ने इसे महिलाओं की बदलती भूमिका और विभिन्न क्षेत्रों में उनके बढ़ते प्रतिनिधित्व के उदाहरण के तौर पर पेश किया।

सवैतनिक मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह किए जाने का उल्लेख

अमित शाह ने मोदी सरकार के तहत सवैतनिक मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 26 सप्ताह किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मातृत्व के दौरान महिलाओं को कार्यस्थल पर बेहतर सुविधा और सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

मातृत्व अवकाश का विस्तार कामकाजी महिलाओं को रोजगार और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में सहायता देने वाली नीतियों के संदर्भ में बताया गया।

‘लखपति दीदी’ योजना को महिला आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ा

शाह ने ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य 2024 से पहले ही हासिल कर लिया गया था।

उन्होंने कहा कि भाजपा-नीत सरकार का लक्ष्य 2029 तक ‘लखपति दीदी’ की संख्या बढ़ाकर छह करोड़ करने का है।

कौन होती हैं ‘लखपति दीदी’?

‘लखपति दीदी’ स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ऐसी महिला सदस्य को कहा जाता है, जिसके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो। इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जाता है।

इसमें महिलाओं को स्थानीय स्तर पर कारोबार, कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियों तथा अन्य आय-सृजन के अवसरों से जोड़ने की कोशिश की जाती है।

सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक अवसर

कुंडारा में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में महिला भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सहकारी समितियों को महिलाओं के लिए सामूहिक आर्थिक गतिविधियों और आय के अवसर उपलब्ध कराने के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

महिलाओं की सहकारी संस्थाओं में भागीदारी बढ़ने से उत्पादन, विपणन और स्थानीय स्तर पर कारोबार जैसी गतिविधियों में उनकी भूमिका बढ़ सकती है।

सहकारिता को महिला सशक्तीकरण से जोड़ने की रणनीति

अमित शाह के भाषण का एक प्रमुख बिंदु सहकारिता, ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण को एक-दूसरे से जोड़ना रहा। उनके अनुसार, सहकारी संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों में शामिल करने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति दी जा सकती है।

उन्होंने महिला सशक्तीकरण को केवल सामाजिक अधिकारों तक सीमित न रखते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता और रोजगार से भी जोड़कर प्रस्तुत किया।

सरकार की महिला-केंद्रित पहलों का एक साथ उल्लेख

कार्यक्रम में शाह ने महिलाओं से संबंधित कई सरकारी पहलों और नीतिगत कदमों का उल्लेख किया। इनमें महिलाओं के बैंक खाते, ‘तीन तलाक’ पर प्रतिबंध, हज यात्रा से जुड़ी सुविधा, सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की भागीदारी, सवैतनिक मातृत्व अवकाश और ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम शामिल रहे।

इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार की महिला सशक्तीकरण से जुड़ी नीतियों की व्यापक तस्वीर पेश की।

2029 तक छह करोड़ ‘लखपति दीदी’ का लक्ष्य

शाह ने कहा कि सरकार अब 2029 तक ‘लखपति दीदी’ की संख्या छह करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय में वृद्धि और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने सहकारिता क्षेत्र को इस व्यापक महिला आर्थिक सशक्तीकरण के प्रयास में महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया।

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