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मुकुल राय का जाना राजनीतिक में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत

राजनीतिक चाणक्य मुकुल राय को विधानसभा में दी गयी अंतिम श्रद्धांजलि

अभिषेक बनर्जी पहुंचें विधानसभा दी श्रद्धांजलि

बंगाल की राजनीति में उनकी रणनीतिक कुशलता, संगठन क्षमता याद किया जाएगा

सबिता राय, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बंगाल की राजनीतिक के चाणक्य कहलाने वाले मुकुल राय का रविवार की देर राय यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। मुकुल राय के चले जाने से राज्य के राजनीतिक में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। लगभग चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बने। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बंगाल से दो बार राज्यसभा सदस्य रहे। ममता बनर्जी के किसी समय सबसे भरोसेमंद सहयोगी और तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार रहे थे। पार्टी में उनकी अहम नीतियों तथा राजनीतिक समीकरणों को साधने की उनकी अद्भुत क्षमता के कारण उन्हें राजनीतिक का चाणक्य कहा जाता था।

विधानसभा में दी गयी श्रद्धांजलि

विधानसभा का माहौल था गमगीन

सोमवार को मुकुल राय के पार्थिव शरीर को पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में लाया गया। श्रद्धांजलि देने के लिए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पहुंचें। अभिषेक ने मुकुल राय के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किये। मुकुल राय के पुत्र शुभ्रांशु राय के साथ काफी देर तक बातचीत की और उनका ढांढस बढ़ाया। स्पीकर विमान बनर्जी, मंत्री फिरहाद हकीम, डॉ. शशि पांजा, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, सुजीत बोस, सांसद पार्थ भौमिक, चीफ व्हिप निर्मल घोष सहित कई विधायकों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। वातावरण गमगीन था और चेहरे पर उनके जाने का दुख साफ झलक यहा था। विधायकों ने कहा कि बंगाल की राजनीति में उनकी रणनीतिक कुशलता, संगठन क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

पार्टी की मजबूती में वरिष्ठ नेता की भूमिका कभी भुलाया नहीं जा सकता : तृणमूल

इस दिन तृणमूल कांग्रेस की तरफ से सोशल साइट पर लिखा गया कि आज हम एक दिग्गज राजनीतिज्ञ को विदाई देते हुए उनके लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हैं। राज्य की राजनीति के दिग्गज नेता और तृणमूल कांग्रेस के प्रतिष्ठापा सदस्य मुकुल राय के निधन से हम बेहद दुखी हैं। संगठन के निर्माण और उसकी संरचना को मजबूत करने में इस वरिष्ठ नेता की भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी भूमिका को इतिहास में याद रखा जाएगा। विभिन्न विचारधाराओं के लोग सार्वजनिक जीवन में उनकी अनुपस्थिति को समान रूप से महसूस करेंगे। पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, रिश्तेदारों और समर्थकों के साथ अंतिम विदाई के लिए हलीशहर श्मशान घाट की यात्रा में उपस्थित थे।

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