पीएम नरेंद्र मोदी के साथ बोस परिवार (फ़ाइल फ़ोटो) 
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क्या लौटेंगी अस्थियां? केंद्र के जवाब के इंतजार में बोस परिवार

रेनकोजी की अस्थियों पर केंद्र से सुप्रीम कोर्ट का जवाब-तलब

कोलकाता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित अस्थियों को जापान के रेनकोजी मंदिर से भारत वापस लाने के मामले में अब बोस परिवार की नजर केंद्र सरकार के रुख पर टिकी है। नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद बोस परिवार यह जानने को उत्सुक है कि केंद्र सरकार रेनकोजी मंदिर में संरक्षित अस्थियों को भारत लाने और उनकी डीएनए जांच कराने के पक्ष में है या इस पूरे विवाद से खुद को दूर रखेगी। परिवार का मानना है कि डीएनए जांच से लंबे समय से चले आ रहे नेताजी की मृत्यु और अस्थियों से जुड़े रहस्य पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने केंद्र सरकार से इस मामले में पहल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियों को भारत लाकर वैज्ञानिक तरीके से उनकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि परिवार केंद्र के जवाब का इंतजार कर रहा है और सरकार का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

चंद्र कुमार बोस के अनुसार, केंद्र सरकार नेताजी से संबंधित लगभग सभी फाइलें सार्वजनिक कर चुकी है। उनका दावा है कि नेताजी के निधन की जांच के लिए अब तक 11 आयोग गठित किए जा चुके हैं। इनमें न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग को छोड़कर अन्य आयोगों ने ताइहोकू विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु की बात कही है।

हालांकि, नेताजी परिवार के कुछ सदस्य और कई शोधकर्ता विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु के सिद्धांत को स्वीकार नहीं करते। रेनकोजी मंदिर की अस्थियों को नेताजी की अस्थियां मानने को लेकर भी मतभेद हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के बाद केंद्र का जवाब इस संवेदनशील और लंबे समय से चले आ रहे विवाद की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

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